कोरोना संक्रमण काल की शुरुआत के साथ ही लोगों के जेहन में मास्‍क के अलावा अगर कोई शब्‍द आया तो वह सैनिटाइजर था। सैनिटाइजर की डिमांड में व्‍यापक स्‍तर पर इजाफा हुआ और लोग इसे घर आफ‍िस और दुकानों के अलावा जेब तक में लेकर घूमने लगे। इसकी वजह से डिमांड में इजाफा तो हुआ ही साथ ही सैनिटाइजर को लेकर भी प्रयोग कोरोना वैक्‍सीन की ही भांति खूब हुआ।

सैनिटाइजर में एल्‍कोहल की अधिक मात्रा और अन्‍स जीवाणु और विषाणुनाशी या‍ैगिकों का मिश्रण होता है। स्किन से संपर्क में आने पर जो जीवाणु या विषाणु चिपके रह जाते हैं उन पर यह सैनिटाइजर एक लेयर बनाकर उनको खत्‍म कर देता है। इसके साथ ही स्किन पूरी तरह जर्म्‍स से सुरक्षित हो जाती है। हालांकि, सैनिटाइजर जेल, और लिक्विड फार्म में आता है। जेल में ग्लिसरीन मिलाकर भी कई उत्‍पादक इसे बेच रहे हैं। इससे हाथ मुलायम बने रहते हैं।

अब कोरोना काल में कोरोना वायरस के रूप बदलने को देखते हुए इसके नए वैरिएंट पर वैक्‍सीन ही नहीं बल्कि सैनिटाइजर तक के प्रभाव पर अध्‍ययन और आमूल-चूल परिवर्तन किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में वाराणसी की युवा वैज्ञानिक ने कोरोना के नए वैरिएंट पर प्रभावी सैनिटाइजर को ईजाद किया है। इससे पूरे महीने भर तक कोरोना वायरस के नए स्‍वरूप से लड़ा जा सकता है।

शिक्षा मंत्री ने किया लॉन्‍च : कोरोना वायरस में नित आ रहे बदलाव को देखते हुए अब सुरक्षा के लिए सैनिटाइजर भी अपडेट किए जा रहे हैं। इस साल अप्रैल में केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक ने आइआइटी-हैदराबाद के नैनो टेक्नोलॉजी पर आधारित सतह क्लीनर (सरफेस डिसइंफेक्टेंट) और सैनिटाइजर (ड्यूरोकिया नामक उत्पाद) लांच किया था।

काशी की युवा वैज्ञानिक ने किया ईजाद : सतह क्लीनर (सरफेस डिसइंफेक्टेंट) और सैनिटाइजर (ड्यूरोकिया नामक उत्पाद) लांच होने के बाद जानकारी सामने आई कि इसे बनारस की युवा वैज्ञानिक डा. रूबी सिंह ने आइआइटी-हैदराबाद के बायोमेडिकल के प्रो. ज्योत्सेंदु गिरि के मार्गदर्शन में तैयार किया है। उन्होंने परीक्षण में पाया कि सतह क्लीनर के छिड़काव के 60 सेकेंड बाद हमारे घर, अस्पताल की फर्श व दीवारें, दरवाजे और खिड़कियां जैसी तमाम सतह 35 दिनों तक कोरोना वायरस और हानिकारक बैक्टीरिया से मुक्त हो जाते हैं। इसे एक बार हाथ पर लगाने के बाद 24 घंटों तक हाथ धुलने की जरूरत नहीं होती। इस दौरान आप कितनी ही बार संक्रमित वस्तुओं को स्पर्श करें। अब यह सैनिटाइजर और सतह क्लीनर सामान्य सैनिटाइजर के मुकाबले काफी किफायती दर पर इंटरनेट बाजार में आ गया है। डा. रूबी ने बताया कि फर्श पर झाड़ू या पोछा करने के बाद भी सतह क्लीनर के नैनो पार्टिकल 35 दिनों तक बने रहे।

खतरनाक वैरिएंट पर प्रभावी : डा. रूबी सिंह के अनुसार कोरोना वायरस के खतरनाक वैरिएंट पर भी यह प्रभावी है। इसके प्रयोग करने के बाद 24 घंटों तक हाथों की सुरक्षा बनी रहती है और फर्श पर भी नैनो पार्टिकल लगभग 35 दिनों तक बने रहते हैं। इसकी वजह से फर्श को साफ करने के बाद माह भर तक सुरक्षा बनी रहती है और हाथ में एक बार प्रयोग करने के बाद पूरे 24 घंटों तक हाथ को साफ न करने के बाद भी हाथाें में वायरस नहीं टिक पाते हैं।  

 

Source: Dainik Jagran