कोरोना वायरस का प्रकोप जब भारत में बढ़ा तो सरकार के पास पर्याप्त किट नहीं थीं, जिससे टेस्टिंग की जा सके। पीपीई किट की भी कमी थी, जिसके जरिए मेडिकल सेवा में लगे वर्कर खुद का बचाव कर सके। नतीजा ये हुआ बहुत सारे मेडिकल वर्कर पीपीई किट की कमी के चलते कोरोना के शिकार हो गए। आखिरकार सरकार ने इससे निपटने के लिए आत्मनिर्भर बनने का रास्ता चुना। पीएम मोदी ने आह्वान किया और बहुत सारी कंपनियों ने पीपीई किट बनानी शुरू कर दीं। इसके जो परिणाम सामने आ रहे हैं, वह फख्र करने लायक हैं।

कभी भारत के पास पीपीई किट की कमी थी और अब भारत में इतने पीपीई किट बन रहे हैं कि हम निर्यात तक करने में सक्षम हो गए हैं। अब हमें चीन से खराब क्वालिटी की पीपीई किट खरीदने की जरूरत नहीं है, बल्कि हम खुद अच्छी क्वालिटी की पीपीई किट एक्सपोर्ट कर रहे हैं। अभी तक पीपीई किट निर्यात करने पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया हुआ था, लेकिन अधिक उत्पादन को देखते हुए सरकार ने हर महीने 50 लाख पीपीई किट के निर्यात की मंजूरी दे दी है। इसे लेकर सरकार ने बाकायदा एक नोटिफिकेशन जारी किया है।

खुद रेल एवं वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस बारे में ट्वीट करते हुए सरकार का नोटिफिकेशन शेयर किया है। उन्होंने लिखा है कि मेक इन इंडिया के तहत निर्यात को बढ़ावा देते हुए कोरोना से बचाव की पीपीई किट के 50 लाख यूनिट हर महीने निर्यात करने को मंजूरी दे दी गयी है। यानी वह साफ-साफ ये कहना चाहते हैं कि सरकार ने मेक इन इंडिया और आत्म निर्भर बनने का जो सपना देखा, वह अब साकार हो रहा है।

विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने एक अधिसूचना में कहा है, ‘‘कोविड-19 इकाइयों के लिये 50 लाख पीपीई चिकित्सा उपकरण का निर्यात कोटा तय किया गया है। पीपीई चिकित्सा उपकरण निर्यात करने वाली पात्र इकाइयों के लिये निर्यात लाइसेंस जारी करने के वास्ते यह कोटा तय किया गया। इसके पात्रता मानदंडों के वास्ते अलग से व्यापार नोटिस जारी किया जायेगा।’’ इसमें कहा गया है कि पीपीई किट से जुड़े अन्य हिस्से निषेध सूची में बने रहेंगे।

 

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