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देवप्रयाग से गंगासागर तक की यात्रा से अध्ययन एवं प्रवास अभियान के तहत कायमगंज पहुंचे भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव केएन गोविदाचार्य ने कहा कि वैश्वीकरण से नहीं बल्कि स्वदेशी भावना व आधुनिकीकरण के समन्वय से ही देश की समस्याओं का निराकरण व वास्तविक विकास हो सकेगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पूर्णकालिक प्रचारक व भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रहे गोविदाचार्य ने कायमगंज के गायत्री धाम शिवाला भवन में शुक्रवार को पत्रकार वार्ता में कहा कि 20 वर्ष पहले की राजनीतिक परिस्थिति में उन्होंने राजनीति से विरत होकर अध्ययन अवकाश का फैसला ले लिया था।

इसके बाद वह निष्ठावान स्वयंसेवक के रूप में आर्थिक व सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुनर्जागरण के लिए प्रयत्नशील हैं। उन्होंने अपने अध्ययन में पाया कि वैश्वीकरण की प्रवृत्ति से केंद्रीयकरण, बाजारवाद व एकरूपीकरण को ही बढ़ावा है। जिसका समाधान विकेंद्रीयकरण, विविधीकरण, बाजार मुक्ति व स्थानिकीकरण ही है।

वैश्वीकरण की प्रवृत्ति हमारे देश की परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है। भारत को दुनिया की जरूरत कम है, दुनिया को भारत की जरूरत ज्यादा है। तमाम संसाधनों से संपन्न हमारा देश किसी का पिछलग्गू न होकर अपनी सांस्कृतिक, सामाजिक, साधन संपन्नता, तकनीक व कुशलता से विश्व को दिशा देने की क्षमता रखता है। आज जरूरत है कि स्वदेशी मिशन को आधुनिक तकनीक से जोड़ा जाए, जिसकी विश्व भर में कोई प्रतिस्पर्धा नहीं है। इसके लिए सरकार के नहीं समाज के प्रयासों की जरूरत है। हमारे देश का व्यक्ति अब प्रयोगशील न होकर पूर्व व्यवस्था का अनुगामी हो गया है। इस स्थिति से निकलने के लिए जागरूकता की जरूरत है।

अध्ययन एवं संवाद प्रवास के राष्ट्रीय संयोजक पवन श्रीवास्तव ने एक सितंबर को देव प्रयाग से प्रारंभ व दो अक्टूबर को गंगासागर पर संपन्न होने वाले प्रवास अभियान के उद्देश्य व सार्थकता पर चर्चा की। इस दौरान भाजपा नेत्री मिथलेश अग्रवाल, गायत्री परिवार संयोजक सुरेंद्र गुप्ता, पवन गुप्ता, मनोज कौशल, मुन्नालाल गुप्ता, सुधीर गुप्ता आदि मौजूद रहे।

 

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