स्वदेशी जागरण मंच 

राष्ट्रीय परिषद बैठक (तरंग)

जून 5-6, 2021

प्रस्ताव-1
भारतः वर्तमान आर्थिक परिदृश्य और अग्रिम संभावनाएँ

कोविड-19 अथवा कोरोना वायरस ने पिछले 18 महीनों से सम्पूर्ण मानवता को बुरी तरह प्रताड़ित करके रखा हुआ है। वायरस के दुष्प्रभाव को रोकने के उद्देश्य से सम्पूर्ण विश्व में वैक्सीन (टीका) खोज की तीव्र प्रतिस्पर्धा प्रारंभ हुई और बड़ी सफलताएँ भी प्राप्त हुई। सभी देश अपने नागरिकों को टीका लगाने के लिए एक विशाल टीकाकरण अभियान में तो जुट ही गये है साथ ही महामारी के प्रकोप को कम करने के लिए राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन भी लगा रहे हैं। स्वदेशी जागरण मंच का दृढ़ विश्वास है कि महामारी के कारण होने वाले इस भयंकर अभूतपूर्व तबाही को समाज के हर वर्ग के एकीकृत ठोस प्रयासों से ही दूर किया जा सकता है।
कठोर लॉकडाउन जैसे कड़े कदमों से न केवल विश्व अपितु भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी दुष्प्रभाव पड़े हैं जिनके कारण परिवहन (उड्डयन, रेल, सड़क व जल यातायात), पर्यटन, शिक्षा, खुदरा व्यापार, तेल एवं प्राकृतिक गैस आदि क्षेत्रों में आर्थिक संकट के चलते कर्मचारी छंटनी करनी पड़ी है। अंतरराष्ट्रीय श्रमिक संगठन (आईएलओ) के अनुसार 2019 के अंतिम तिमाही की तुलना में 2020 के अंतिम तिमाही में 8.8 प्रतिशत वैश्विक काम करने के घंटों में कमी आई जो कि 25.5 करोड़ नौकरियों समाप्त होने के समान है। ये 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट से उभरी आर्थिक मंदी में नष्ट हुई नौकरियों का भी चार गुना है। अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान एजेन्सी स्टैंडर्ड एंड पूर्स ैजंदकंतक – च्ववतष्े (ै-च्) के अनुमान के अनुसार भारत में चल रही कोरोना वायरस की दूसरी लहर में अप्रैल-जून तिमाही में 210 मिलियन डालर (1536 करोड़ रुपये) के प्रतिदिन उत्पादन का नुकसान हो रहा है।
विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार कोरोना वायरस के कारण 2020 में वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद में 4.3 प्रतिशत की संकुचन दर रही और यू.एस.ए. (संयुक्त राज्य अमेरिका) के सकल घरेलू उत्पाद में 3.6 प्रतिशत, यूरोपियन संघ (यूरोपियन यूनियन) में 7.4 प्रतिशत, जापान में 5.5 प्रतिशत और उभरते व विकासशील देशों में 2.6 प्रतिशत की संकुचन दर रही। विश्व की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था भारत भी इस वैश्विक महामारी से पिछले वर्ष प्रभावित हुआ जिसके फलस्वरूप भारत के सकल घरेलू उत्पाद में 7.9 प्रतिशत की संकुचन देखी गयी। फिर भी, भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2021-22 में भारत 9.5 प्रतिषत की दर से बढ़ेगा। भारत ने महामारी की पहली लहर का बड़े ही प्रभावशाली तरीके से सामना किया और आर्थिक मंदी से उभरना शुरू किया परंतु अप्रैल 2021 में आयी दूसरी लहर ने एक और झटका देते हुए अर्थव्यवस्था को भारी क्षति पहुँचाई हैं।
भारत सरकार ने इस बार राष्ट्रव्यापी सम्पूर्ण लॉकडाउन न लगा के राज्यों को पूर्ण स्वतंत्रता दी ताकि वे अपने राज्य की कोरोना स्थिति अनुसार लॉकडाउन का प्रारूप तय कर सके। इससे कृषि, लघु, मध्यम व भारी उद्योग क्षेत्रों में उत्पादन चलता रहा। फिर भी 2020 में अप्रैल से मई तक लगे राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन से 10 करोड़ नौकरियों समाप्त हो गयी और वर्तमान में मई 2021 में लॉकडाउन के चलते 1.53 करोड़ नौकरियाँ नष्ट हो गयी और देश के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर बढ़कर 18 प्रतिशत हो गयी।
एक हालिया रिपोर्ट (स्टेट ऑफ वर्किंग इंडिया 2021ः कोविड -19 का एक वर्ष, अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय) इस बात पर प्रकाश डालती है कि यदि चार सदस्यों का एक औसत घर माना जाए, तो जो जनवरी 2020 में रुपये 15,989 मासिक प्रति व्यक्ति आय हुआ करती थी वह अक्टूबर 2020 में घटकर रुपये 14,979 पर आ गई है। युवा श्रमिकों (15-24 वर्ष आयु वर्ग) के बीच बेरोजगारी अधिक है जो रोजगार की पुनः प्राप्ति में विफल रहें हैं। अजीम प्रेमजी विश्वविद्यालय की रिपोर्ट में महामारी के दौरान अनौपचारिक रोजगार क्षेत्र में तेजी से वृद्धि देखी गई है क्योंकि वेतन भोगी कर्मचारी स्वरोजगार और दैनिक मजदूरी गतिविधियों की ओर बढ़ गए हैं।
यह एक पूर्व विदित निष्कर्ष है कि स्वास्थ्य व्यय में वृद्धि और रोजगार के अवसरों में कमी ने गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति को और खराब कर दिया है, गरीबी के स्तर में वृद्धि की है और धन असमानताओं में योगदान दिया है।
दूसरी ओर, मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लि० द्वारा पाया गया कि अप्रैल-जून 2020 के दौरान भारत की घरेलू बचत जीडीपी के 28.1 प्रतिषत से घटकर 22.1 प्रतिषत हो गई जो एक गंभीर संकेत है। घटती घरेलू बचत और गिरती आय का परिवार की घरेलू खपत और स्वास्थ्य देखभाल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जो सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 60 प्रतिषत है। निशुल्क राशन, नकद हस्तांतरण, डळछत्म्ळ।, प्रधानमंत्री किसान भुगतान, पेंशन भुगतान, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (च्डळज्ञल्) और आत्मनिर्भर भारत पैकेज जैसे सरकारी राहत उपायों ने 2020 में महामारी से प्रभावित जनसंख्या के सबसे कमजोर वर्ग को सुखदायक प्रभाव प्रदान किया है। स्वदेशी जागरण मंच कोरोना वायरस के कारण उपजे वर्तमान स्वास्थ्य और आर्थिक संकट से निपटने के लिए सरकार की राजकोषीय प्रोत्साहन नीति और 4 जून 2021 को सेवा क्षेत्र को 15,000 करोड़ ऋण की घोषणा की सराहना करता है। स्वदेषी जागरण मंच का दृढ़ विश्वास है कि महामारी के कारण होने वाले इस भयंकर तबाही को समाज के हर वर्ग के एकीकृत ठोस प्रयासों से ही दूर किया जा सकता है। देश की इस अभूतपूर्व कठिन परिस्थिति में, स्वदेशी जागरण मंच अपील करता है –
निशुल्क खाद्य अनाज के अतिरिक्त समाज के कमजोर वर्गों को राजकोषीय सहायता देने पर विचार कर अमल करना।
ग्रामीण रोजगार को प्रोत्साहन देने के लिए मनरेगा योजना डछत्म्ळ। के अंतर्गत निधि आवंटन में पर्याप्त वृद्धि की जाए।
आपातकालीन क्रेडिट लाइन गारंटी योजना को कुछ और महीनों के लिए बढ़ाया जाना चाहिए और इसकी परिधि में महामारी से ग्रसित अन्य आर्थिक क्षेत्रों को भी लाया जा सकता है।
कोरोना वायरस के कारण लगे लॉकडाउन से बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों जैसे परिवहन, पर्यटन, विमानन, मत्स्य पालन, बागवानी आदि के लिए विशिष्ट प्रोत्साहन के रूप में नरम ऋण घोषित करना।
मध्यम छोटे और सूक्ष्म उद्यम (डैडम्) क्षेत्र को मजबूत करने के लिए रोजगार से जुड़े प्रोत्साहन (म्स्प्) पैकेज की घोषणा करना।
भारतीय रिजर्व बैंक को स्पष्ट रूप से अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र के आवश्यकता अनुरूप ऋण अधिस्थगन (लोन मोरटोरियम) घोषणा करनी चाहिए और उदार मौद्रिक समर्थन के लिए बैंकों को निर्देशित करना चाहिए।
कोविड राहत के लिए कॉर्पोरेट और व्यापारिक संस्थानों को उदार योगदान दे कर कठिन स्थिति का प्रबंधन करना चाहिए, बिना किसी छंटनी के कर्मचारियों को का समय पर वेतन भुगतान और मध्यम छोटे और सूक्ष्म उद्यम (डैडम्) क्षेत्र की इकाइयों के बिलों का समय पर भुगतान।
निजी स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं को इस विकट परिस्थिति में लाभ हानि के विचार त्यागकर न्यूनतम लागत के साथ उपचार सुनिश्चित करना चाहिए।

इस महामारी ने इस भ्रम को दूर कर दिया है कि शहरीकरण ही विकास का एकमात्र उपाय है। यह निर्णायक रूप से सिद्ध हो गया है कि प्रौद्योगिकी की सहायता से, दूरस्थ या ग्रामीण क्षेत्रों से पर्याप्त आर्थिक गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है, जिससे पर्याप्त रोजगार देने वाला विकेंद्रीकृत विकास मॉडल का मार्ग प्रशस्त होता है। अंत में, स्वदेशी जागरण मंच आह्वान करता है कि समाज के प्रत्येक वर्ग को इन अद्वितीय कठिन परिस्थितियों में पारस्परिक सहयोग से हर संभव तरीके से एक-दूसरे की सहायता करनी चाहिए।
स्वदेशी जागरण मंच दृढ़ता से भारत की अंतर्निहित ताकत में विश्वास करता है जो वर्तमान कठिन परिस्थितियों से निपटने में पूर्णतः सक्षम है। आइए हम सभी आपसी विश्वास के साथ मिलकर काम करें ताकि भारत को इसका वैभव और गौरव पुनः प्राप्त हो सके।