पिता जोधपुर रेलवे स्टेशन पर बैज नम्बर 38 के कूली है, बेटा ननिहाल में रहकर पढ़ा। पांच साल पहले सपना था आईआईटी में सलेक्ट होने का। लेकिन सपना पूरा नहीं हो पाया। इसके बाद बीकानेर के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला लिया और चार साल मेहनत कर सर्किट डिजाइन में मास्टरी हासिल कर ली। अब इसी मेहनत के बूते आईआईटी मंडी हिमाचल प्रदेश की स्टार्टअप कंपनी में ऑपरेशन इंजीनियर पद पर चयन हुआ है।

यह कहानी है ईश्वरलाल की जो कि जैसलमेर जिले के फलसूंड के रहने वाले हैं। पिता पेपाराम प्रजापत जोधपुर रेलवे स्टेशन पर कूली का काम करते हैं। बचपन से जोधपुर जिले के बालेसर में रहकर ही पढ़ाई की। विज्ञान विषय में पढऩे की लालसा थी तो जोधपुर शहर आ गए। यहां से 12वीं करने के बाद आईआईटी में जाने का सपना था।

आर्थिक और पारिवारिक रूप से मामा और अन्य रिश्तेदारों ने मदद की। जब 2015 में सपना पूरा नहीं हुआ तो इन्होंने सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेज में इलेक्ट्रोनिक व इंस्ट्रूमेंटेशन में इंजीनियरिंग शुूरू की। पीसीबी व इलेक्ट्रोनिक सर्किट बनाने में महारथ हासिल करने के बाद उनका चयन आईआईटी मंडी हिमाचल प्रदेश की स्टार्टअप कंपनी में हुआ है।

प्राकृतिक आपदाओं पर शोध करेंगे

बीकानेर इंजीनियरिंग कॉलेज में विभागाध्यक्ष हरजीतसिंह ने बताया कि ईश्वर को आईआईटी मंडी के प्रोफेसर वरूण दत्त ने उनका इंटरव्यू लेकर उनके काम के आधार पर आईआईटी की ही स्टार्टअप कंपनी इंट आई ओ टी सर्विसेज प्रा. लि. में ऑपरेशन इंजीनियर ट्रेनी के पद पर किया है। ईश्वर अब यहां की टीम के साथ मिलकर देशभर में प्राकृतिक आपदाओं जैसे भूकंप, बाढ़ की पूर्वसूचना या चेतावनी देने वाली तकनीक पर शोध करेगा और सर्किट विकसित करेगा।

अभावों में संघर्ष

ईश्वर का परिवार आर्थिक रूप से सक्षम नहीं था। पिता के साथ एक छोटा भाई जोधपुर में रहता है। जबकि एक भाई और बहन मां के साथ जैसलमेर जिले के गांव में रहते हैं। ईश्वर ने आईआईटी की कंपनी में महज 21 साल की उम्र में एंट्री कर ली है।