माननीय भागैया जी

ग्रामीण भारत में हैं विकास व रोजगार की अपार संभावनाएं!…
कल राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह माननीय भागैया जी ने ‘स्वदेशी स्वावलंबन की और भारत’ पुस्तक के हिंदी, अंग्रेजी दोनों संस्करणों का विमोचन करते हुए “स्वदेशी ही भारत का भविष्य है” यह जोर देकर कहा।

उन्होंने आगे कहा “भारत के गांव कभी विकास व मैन्युफैक्चरिंग के केंद्र थे। हमारी उद्योग व्यवस्था विकेंद्रित थी, आगे भी हमें इसी तरफ बढ़ने से उपयोग होगा। FPO योजना किसानों के लिए उपयोगी होगी।”

उन्होंने स्वदेशी जागरण मंच द्वारा चलाए जा रहे स्वदेशी स्वावलंबन अभियान को बहुत उत्तम बताते हुए बाकी सब संगठनों और व्यक्तियों को इस में सहयोग करने का आवाहन भी किया। प्रोफेसर भगवती प्रकाश जी ने बताया कि भारत के 739 जिलों में से 700 से अधिक जिलों में हस्ताक्षर चल रहे हैं। कुल 20 देशों से भी हस्ताक्षर हो रहे हैं।

इस अभियान का केंद्रीय विचार है….”स्वदेशी स्वीकार,चाइनीज बहिष्कार। स्वावलंबी भारत,भविष्य का आधार।”
…उन्होंने कहा “वर्तमान सन्दर्भ में लिखी गयी उक्त पुस्तक का उपयोग,इस अभियान के वैचारिक आधार के रूप में होगा।”

सब का धन्यवाद करते हुए सुंदरम जी ने स्वावलंबी व आत्मनिर्भर भारत बनाने हेतु स्वदेशी के कार्यकर्ताओं को कड़े परिश्रम करने का आह्वान भी किया। प्रोफेसर राजकुमार मित्तल जी (VC) ने कार्यक्रम का संचालन किया।
~सतीश कुमार