आज सवेरे मैं सैर के लिए निकला तो आर.के. पुरम सेक्टर 8 के गार्ड ने मुझे “राम राम जी!” कहा।
मैंने जवाब दिया और साथ ही पूछा “क्या हाल है भाई! घर में सब ठीक हैं बाल बच्चे राजी हैं?”
तो उसने कहा “राम जी की कृपा है बहुत बढ़िया चल रहा है।”
मैंने पूछा “कितने बच्चे हैं, दिन में भी कुछ काम करते हो क्या?”
वह बोला “नहीं साहब! काम करने की मुझे अब कोई जरूरत नहीं है। मेरे तीन लड़के और एक लड़की हैं सब की शादी कर दी है, सब सुखी हैं।”

मैंने पूछा “मकान अपना है क्या और बच्चे कितना कमाते हैं?”
वह बोला “चारों बच्चों को अच्छा पढ़ाया है एक लड़का लकड़ी का काम करता है दूसरा ड्राइवर है और दो गाड़ीयां अपनी रखी हैं। तीसरा सीपीडब्ल्यूडी के साथ कॉन्ट्रैक्ट में है लड़की अपने घर सुखी है।”

फिर मैंने पूछा “मकान अपना कैसे बना लिया दिल्ली में?”
वह बोला “30 साल मैंने पलंबर का काम किया। शुरू में एक साल एक कंपनी में नौकर रहा फिर उसी में ही कॉन्ट्रैक्ट ले लिया। 5-6 लड़के मेरे साथ रहे, मैंने उन्हें सिखाया भी, रोज़गार भी दिया। और मैंने खूब मेहनत की इमानदारी से उसमें इतना पैसा बचाया कि अब मेरे पास यहीं सेक्टर 6 में 3 मंजिला मकान है। एक रुपये का भी कर्ज नहीं है, मुझ पर।”

मैंने कहा “दिन में कुछ काम क्यों नहीं करते?”
कहने लगा “पैसों की अब मुझे जरूरत नहीं है। मेरे 10 पोते पोतिया हैं। सारा दिन कभी कोई मेरे पैर दबाता है कभी कोई सिर। कभी मैं उनको स्कूल छोड़ने जाता हूं कभी वह मेरे पास शाम को आकर खेलने लगते हैं। शनिवार इतवार को मेरे को नहलाते हैं। मैं इतना सुख छोड़कर अब और कमाई किस लिए करूं?”

उसका संतुष्टि भाव देखकर मैं सोच में था इस आदमी ने स्वरोजगार से दिल्ली में अपना 3 मंजिला मकान बना लिया, बच्चे बहुत अच्छे सेट कर लिए, पोते पोतियो का सुख पा रहा है, और क्या चाहिए?”
उसकी बातें और आंखों से जो प्रसन्नता, संतुष्टि झलक रही थी, क्या कोई अरबपति आदमी भी इतना होता होगा? मैं चिंतन करते हुए आगे बढ़ने लगा।

मुझे सुखी व संतुष्ट जीवन की नई परिभाषा व प्रत्यक्ष कहानी मिली। मित्रता वश, मैंने उसके साथ सेल्फी खिंचवाने ही थी…मेरा नया यार…गार्ड लालमन!