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जॉय आरकल व वायनाड (केरल) में उनका आलीशान बंगला!

पिछले सप्ताह केरल के अरबपति व्यापारी जॉय आरकल दुबई की बिल्डिंग, बिजनेस बे की 14वीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर गए। केरल में सबसे आलीशान मकान उनका है, करोड़ों नहीं, अरबों रुपए का! यूएई दुबई में उन्हें गोल्डन कार्ड मिला हुआ है यानी जब तक चाहे वह वहां के नागरिक की सुविधा ले सकते हैं। दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनीयों मे से एक के मालिक थे। 11 कंपनियों के बोर्ड पर थे।

किंतु पारिवारिक व व्यावसायिक तनावों को ना झेलते हुए केवल 54 वर्ष की आयु में आत्महत्या कर गए। वैसे भी सर्वाधिक आत्महत्याएं जापान जैसे विकसित देश में होती हैं। अमेरिका, इंग्लैंड में नींद की गोली खाए बिना 40% लोगों को नींद नहीं आती।

अपार धन, दौलत व शोहरत के बाद भी ऐसा अंत क्यों? क्योंकि हम सब लोग सुख की परिभाषा केवल धन वैभव और शोहरत में ही ढूंढते हैं।
तो फिर प्रश्न उठता है कि सुख की असली परिभाषा क्या है?

दीपक चोपड़ा अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘जीवन में सफलता के सात आध्यात्मिक नियम’ में कहते हैं जीवन की सफलता, अपने आसपास के लोगों से मधुर संबंध, शारीरिक स्वस्थता, दूसरों को कुछ देने की भावना(सेवा) व उच्च नैतिक, आध्यात्मिक मूल्यों में होती है।

यहीं हम चूक कर जाते हैं। जब सुख की परिभाषा, जीवन की प्राथमिक आवश्यकता-धन को ही मान लेते हैं। यदि हम सुख की परिभाषा ठीक कर लें, तो कभी कोई जॉय आरकल आत्महत्या नहीं करेगा। रोज-रोज की घर परिवारों में जो कलह होती है, समाप्त होते देर नहीं लगेगी।….जरा सोचिए!
~सतीश कुमार