Image may contain: 1 person, text that says "भविष्य का भारत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ"

गत 15 मार्च से बेंगलुरु में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक थी। किंतु शुरू होने से पूर्व वाले दिन ही संघ के वरिष्ठ अधिकारियों ने पहले पहुंचे प्रमुख कार्यकर्ताओं को बुलाया और कहा कि कर्नाटक और देश में कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ है। सरकार ने एडवाइजरी जारी की है। यद्यपि हमारे यहां कोई खतरा नहीं है और आने वालों की सब प्रकार की स्क्रीनिंग की जा रही है।

फिर भी संगठन ने निर्णय किया है की हमें सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखना है। और समूह में इकट्ठे होना, यह केवल हमारे ही नहीं समाज के स्वास्थ्य के लिए भी अच्छा नहीं है। इसलिए चाहे लोग रास्ते में हों, फ्लाइट बुक की हुई हों, किंतु सबको सूचना भेजो और वहीं से ही सब लोग वापस चले जाएं! और 1 वर्ष पूर्व निर्धारित की हुई 1500 लोगों की इस बैठक को रद्द कर दिया गया।

दूसरी तरफ लगभग 13-14 मार्च से ही दिल्ली के इस्लामिक सेंटर में तबलीगी जमात के 8-9 हजार लोग इकट्ठे हुए, आते जाते रहे, यहां तक कि जनता कर्फ्यू की घोषणा हो गई, भारत लॉक डाउन कर दिया गया, पुलिस/प्रशासन ने बार-बार समझाया। किंतु 29 मार्च की रात्रि तक, जब तक अजीत डोभाल वहां जाकर साम-दाम-दंड-भेद की नीति नहीं अपनाए, तब तक वे मूर्ख तबलीगी वहीं डटे रहे! और ना केवल एक हजार से अधिक स्वयं कोरोना ग्रस्त हो गए बल्कि उनके कारण से लाखों को संकट में डाला, देश को संकट में डाला!
और ऊपर से बयान दे रहे हैं अल्लाह के नाम के!

यह पिछड़ी और सांप्रदायिक सोच से देश और समाज कैसे संकट में फंस जाते हैं, इसका उदाहरण है! देश ही नहीं, दुनिया भर में, इन पर और इनके समाज पर थू-थू हो रही है।
और संघ देश समाज के, स्नेह, विश्वास व श्रद्धा का केंद्र बना है।