(एक चिट्ठी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नाम)
आदरणीय शी जिनपिंग जी, 你好 (नमस्कार)।

आपसे कभी मुलाकात हुई नहीं, शायद होगी भी नहीं। किंतु एक बात की तरफ मैं आपका ध्यान दिलाना चाहता हूं। आपने गत 15 तारीख को जो भारतीय सीमा में अतिक्रमण करने का प्रयास किया, जिसमें हमारे 20 जवान शहीद हुए। उसके कारण से आपने इस सोए हुए भारत को जगा दिया है।

स्वदेशी जागरण मंच 2010 से ही चीनी सस्ते पर घटिया आयातों से देश को अवगत कराता रहा है। भारत को हो रहे व्यापार घाटे और उसके परिणाम स्वरूप बंद होती यहां की फैक्ट्रियां और बेरोजगार होते युवा, ऐसी बड़ी दर्दनाक स्थिति बनी हुई थी। इसलिए स्वदेशी जागरण मंच ने इन 10 वर्षों में ‘स्वदेशी स्वीकार चाइनीज बहिष्कार’ का खूब प्रचार किया।

2017 में तो ‘राष्ट्रीय स्वदेशी सुरक्षा अभियान’ यह व्यापक अभियान भी लिया। जिसका कुछ परिणाम भी आया था। किंतु अब समाज से लेकर सरकार तक सामान्य वर्गों से लेकर उच्चतम स्तर तक, सब पूरी तरह से चाइनीज बहिष्कार में लग गए हैं।हरियाणा, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र की सरकारों ने अनेक ठेके कैंसिल किये हैं। नितिन गडकरी के मंत्रालय ने हाईवे तो रेल मंत्रालय ने रेलवे के और बिजली विभाग ने बिजली सामान हेतु चीनी के कंपनियों के टेंडर खत्म करने शुरू कर दिए हैं। हमारा व्यापार घाटा पिछले वर्ष तक भी, आपके देश चीन से कोई 55 अरब डालर का था। और इसके कारण से लाखों लोगों का रोजगार हमारा आपने छीन रखा था।

किंतु अब क्योंकि हम हर एक चीज में पूर्णतया चाइना बॉयकॉट कर ही रहे हैं, तो अगले दो-तीन वर्षों में भारत दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब बन ही जाएगा। जिससे लाखों क्या, करोड़ों रोजगार यहां पर पैदा होंगे। आप सोचिए! इस सारे से आपको क्या मिला? चीन को क्या मिला?

केवल भारत में नहीं, दुनिया भर में चीन की थू थू हो रही है। आप 525 अरब डॉलर की हर साल कमाई वाले दुनिया की एकमात्र इकोनॉमी थे। जिसके कारण से गत 20-25 वर्षों में आपने खूब विकास किया अपने लोगों को रोजगार दिया।

अब यह नहीं रहेगा आपके देश में। बेरोजगारी, गरीबी बढ़ेगी। फैक्ट्रियां बंद होंगी। 500 से अधिक तो निकल भी चुकी हैं। सोचो! नुकसान किसका अधिक है? किसी देश की विश्वसनीयता ही उसका सबसे बड़ा आधार होता है।

फिर भारत अब 1962 वाला नहीं रहा। वह अब मुंह तोड़ जवाब भी देगा ही। आर्थिक क्षेत्र में तो शुरू हो ही गया है, सैन्य क्षेत्र में भी अब आपको पछताना ही पड़ेगा। जो भी हो, हम तो वसुधैव कुटुंबकम वाले हैं, आपको यदि सदमती आ जाए, तो चीन का और दुनिया का भला ही होगा। जरा सोचिए!”

~सतीश कुमार