अजित डोभाल व चीनी विदेश मंत्री

लद्दाख में भी दोहराई गयी डोकलाम जैसी जीत!!
बड़े हथियारों से नहीं, बड़े इरादों व एकजुटता से मिलती है…विजय!

लद्दाख की गलवान घाटी से चीन पीछे हट गया है। अपने सैनिक ही नहीं, टेंट सामान, सब कुछ उखाड़ कर पीछे हटा है। सबको मालूम पड़ ही गया है कि भारत के सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल व चीनी विदेश मंत्री की बातचीत के बाद यह प्रक्रिया पूरी हुई।
सबको याद होगा 2017 में भूटान बॉर्डर पर डोकलाम में भी चीन ऐसे ही आया था। 40 दिन तक सेनाएं आमने सामने खड़ी रही थी। अंत में चीन को पीछे हटना पड़ा। लगता है चीन और पाकिस्तान को हर बार हारने की, और हमें हराने की आदत लग गई है।

लेकिन एक बात है कि पाकिस्तान तो चलो बच्चा है, पर चीन की सेना हमारे से 5 गुना अधिक हथियारों व बजट वाली मानी जाती है। फिर कैसे हुई ये जीत?

वास्तव में भारत ने मजबूती व तेजी के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग जुटाया और विश्व भर में चीन जब घिर गया, और फिर मंदी में फंसी चीनी अर्थव्यवस्था को भारत जैसे बड़े बाजार को खोना, यह बहुत कठिन लगा तो चीन को पीछे हटने का निर्णय करना पड़ा।

भारत में चाइनीज बॉयकॉट इतना प्रबल हो जाएगा, कि उसे 55 अरब डालर का वार्षिक फायदा, जीरो होता दिखा, इतनी उसे उम्मीद नहीं थी। भारत की सेना, सरकार, सामान्य जनता, उद्योगपति, व्यापारी, ब्यूरोक्रेसी, नेता, अभिनेता सब उठ खड़े हुए, चीन को सबक सिखाने।

जब देश के इरादे नेक हों, समाज मे एकजुटता हो, सरकार मजबूत हो तो चीन जैसी बड़ी शक्ति को भी झुकना पड़ता है।
अब यही काम स्वदेशी स्वावलंबन के मुद्दे पर भी करना है।

“स्वदेशी स्वीकार चाइनीज बहिष्कार…स्वावलंबी भारत, भविष्य का आधार” इसे इस देश का मंत्र बनाना है। क्योंकि हर व्यक्ति को रोजगार, हर परिवार को समृद्ध करना ही लक्ष्य है…चरैवेति-चरैवेति यही तो मंत्र है अपना….

~ सतीश कुमार