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स्वयंसेवक भोजन पैकेट वितरण करते हुए

क्या आपको पता है कि, कोरोना युद्ध में जिस दवाई की मांग एकदम से बढ़ गई है, उस Hydroxychloroquine की विश्व में 70% सप्लाई भारत से ही होती है?
भारत के पास हर महीने ऐसी 40 टन टैबलेट उत्पादन करने कि क्षमता है। Ipca और Zydus (दोनों भारतीय कम्पनियां है) ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर इसका उत्पादन बढ़ाया भी जा सकता है।
आज अमेरिका भी इस दवाई के लिए भारत के सामने गिड़गिड़ा रहा है, (ट्रंप द्वारा धमकी देने कि खबर भ्रामक है)। इसके साथ ही 30 अन्य देशों में भी हम यह दवाइयां भेज रहे हैं।

इसके लिए बांग्लादेश, श्रीलंका और ब्राजील के राष्ट्रपति भारत का धन्यवाद भी कर चुके हैं।
ये होता है बड़ा देश!
बड़ा देश केवल पैसे से नहीं बनता, केवल रक्षा क्षमता से नहीं बनता, बड़ा देश बनता है, बड़ी सोच से, कठिनाई के समय सबकी चिंता करने से बनता है, परिवार के बड़े सदस्य की भांति।

केवल इतना ही नहीं, भारत दुनिया का सबसे बड़ा दवाइयों का निर्यातक देश है, और विश्व में कुल मांग की 20% दवाइयां भारत से ही एक्सपोर्ट होती हैं। अमेरिका जैसा देश भी 47% दवाइयां भारत से खरीदता है। भारत में बनी दवाइयां सस्ती होती है, वह इसलिए कि हमारी सोच बेइंतेहा पैसा कमा के शोषण करने की नहीं है, बल्कि सेवा भाव की है।
सुश्रुत और दधीचि की परम्परा आज भी जारी है। महर्षि सुश्रुत ने विश्व को आयुर्वेद-शल्य चिकित्सा का ज्ञान दिया। और महर्षि दधीचि ने संसार हित के लिए अपनी हड्डियां तक दान में दे दी।

~स्वदेशी एजुकेटर