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परसों दिल्ली में हुए एक कार्यक्रम में कमलजीत जी,सत्यवान जी,डॉ अश्विनी महाजन, विकास चौधरी व अन्य।

कल मैंने अपने अर्थ एवं रोजगार सृजक सम्मान कार्यक्रम में वक्ता के नाते, रहने के लिए एक वरिष्ठ अधिकारी को फोन किया।
वे बोले “सतीश जी! आप कह रहे हैं, तो चले तो जाएंगे ही पर क्या इन कार्यक्रमों से देश आत्मनिर्भर व रोजगार युक्त हो जाएगा?”
मैंने कहा “एक बात तो पक्की है की रोजगार, सरकारें व बहुराष्ट्रीय कंपनियां तो देने से रहीं,यह इनके बस की बात ही नहीं रही।रोजगार तो कोई दृढ़ इच्छाशक्ति व साहस वाला गरीब आदमी ही पैदा करता है।”

वे कहने लगे “गरीब आदमी? वह कैसे रोजगार पैदा करता है?”
मैंने कहा “इस दुनिया की सबसे पहले एक ट्रिलियन डॉलर की कंपनी बनी एप्पल कंप्यूटर। इस एप्पल कंप्यूटर के तीन लाख से अधिक कर्मचारी हैं। किंतु इस कंपनी को किसी अमेरिका की सरकार ने या बहुराष्ट्रीय कंपनी ने नहीं शुरू किया था। इसे शुरू किया था स्टीव-जॉब ने। जिसके पिता इतने गरीब थे कि वह उसको प्लस टू के बाद किसी अच्छे कॉलेज में दाखिला नहीं दिलवा पाए, क्योंकि उनके पास इतने पैसे ही नहीं थे। इसलिए वह कोई डिग्री कर ही नहीं पाए। किंतु स्टीव जॉब में आत्मविश्वास था, दृढ़ इच्छाशक्ति थी, साहस था। उसी का ही उपयोग करके उन्होंने एक गैराज में अपनी पहली लैब शुरू की और धीरे-धीरे करके (केवल 52 वर्ष की आयु वे जिए) और दुनिया के लाखों लोगों को रोजगार दे गए, सबसे बड़ी पूंजी वाली कंपनी खड़ी कर गए।”

वे थोड़ा हैरान हुए और बोले “कोई भारतीय उदाहरण भी है क्या?”
मैंने कहा “बहुत हैं। लेकिन सबसे चर्चित तो बाबा रामदेव ही है। न उनके पास कोई इंजीनियरिंग की डिग्री थी न पैसा था न अन्य कुछ। किंतु आज पतंजलि के कारण से एक लाख से अधिक लोग सीधे रोजगार पा रहे हैं और 20000 करोड़ रुपए की कंपनी बन गया है पतंजलि। क्योंकि बाबा रामदेव व आचार्य बालकृष्ण में के तीनों गुण अवश्य हैं”
स्वदेशी जागरण मंच चाहता है कि भारत के युवक भी अपने इन्हीं गुणों और प्रतिभा के आधार पर ही रोजगार विकसित करें और देश को आत्मनिर्भर बनाएं।
यही भाव जागरण करने के लिए ही देश में 500 से अधिक अर्थ एवं रोजगार सृजक सम्मान कार्यक्रम करने में जुटे हैं, स्वदेशी के कार्यकर्ता।

~सतीश कुमार