त्रिपुरा पूर्वोत्तर भारत का एक छोटा राज्य है। उसके मुख्यमंत्री विप्लव देव पुराने स्वदेशी के कार्यकर्ता हैं। अभी की गर्व करने लायक बात यह है कि उन्होंने त्रिपुरा कि 45 वर्ष व ऊपर आयु के 98% लोगों को, और 18 वर्ष व ऊपर के 80% लोगों को परसों तक वैक्सीन की कम से कम एक डोज लगा दी थी। यह प्रथम राज्य बना है।
50,000 से अधिक हेल्थ कर्मचारी व अन्य उन्होंने इसके लिए झोंक दिए। लोग लगवाना नहीं चाहते थे, डरते थे, दूर पहाड़ी क्षेत्र थे, कबीले थे, विरोध अज्ञानता थी। कच्चे पहाड़ी दुर्गम रास्ते, फिर भी इतनी बड़ी उपलब्धि,कैसे?
जब इच्छाशक्ति हो, तो क्या नहीं हो सकता? त्रिपुरा में 99 वर्ष की आयु के एक व्यक्ति को भी टीका लगाया। मुख्यमंत्री ने खुद बंग्ला व स्थानीय भाषा में अपीलें की। उनकी (कबीलों की) भाषा में अपीलें निकलवाई, उनके मुखियाओं को सम्मानित किया, (फ्रीज व अन्य चीजें इनाम में दी) और अंततः सब कठिनाइयों के बावजूद इस लक्ष्य को प्राप्त कर लिया।
25-27 मई व 21-22 जून को विशेष ड्राइव लेकर 5 लाख लोगों को एक ही दिन में वैक्सीन लगा दी।
मैं 3 महीने पहले त्रिपुरा के प्रवास पर जब गया था तो उनसे मिला था, स्वदेशी के पुराने किस्से उन्होंने सुनाए। कल इंडियन एक्सप्रेस में छपी इस सारे वृतांत को सुनकर मुझे अपने स्वदेशी कार्यकर्ता पर गर्व हुआ। क्योंकि इस समय स्वदेशी के कार्यकर्ता तो देशभर के वैक्सीनेशन को मिशन बनाकर लगे ही हैं।
~सतीश कुमार