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अपने राष्ट्रीय संगठक माननीय कश्मीरी लाल जी कुछ दिन पहले कुरुक्षेत्र में विकास की अवधारणा पर बोलते हुए
एंगस मेडिसन एक ब्रिटिश इकोनाॅमिक हिस्टोरियन हुए है, उन्होंने ‘वर्ल्ड इकोनाॅमिक हिस्ट्री: ए मैलेनियम पर्सपेक्टिव’ लिखा। उसमे उन्होंने कहा कि सन् शून्य ए.डी. से लेकर 1700 ए.डी. तक अर्थात ईसा के जन्म से सन् 1700 ईस्वी तक भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया में सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी। उनके अनुसार इस्वी सन् एक से 1000 ईस्वी तक भारत का दुनिया के जी.डी.पी. में 34 प्रतिशत हिस्सा था। अमेरिका, यूरोप चीन सब पीछे थे। 1000 ईस्वी से 1500 ईस्वी के बीच विश्व के कुल उत्पादन में भारत का अंश 32 प्रतिशत था 1700 ए.डी. में भी यह 24 प्रतिशत था।
रॉबर्ट क्लाइव (अंग्रेजी गवर्नर) ने 1757 में प्लासी का युद्ध लड़ा, और मीर जाफर कि मदद से बंगाल को अपने कब्जे में लिया। कलकत्ता को उसने 7 साल तक लगातार लूटा।
रॉबर्ट क्लाइव जैसे एक के बाद एक 84 गवर्नर ने भारत को लूटा।
एक अध्ययन में कहा गया कि अंग्रेज भारत से ’45 ट्रिलियन डॉलर’ की संपत्ति लूटकर ले गए! जो कि वर्तमान में अमरीका की कुल GDP के दोगुना से भी ज्यादा है।
अंग्रेजो के आने से पहले भारत एक ‘Net Exporting Country’ था। हमारे यहां के लोगों ने पूरी दुनिया में विभिन्न वस्तुएं निर्यात करके सोना इक्कठा किया। इतना सोना इक्कठा किया कि मंदिरों को दान में दिया।
कहीं भी सोने के मस्जिद या गिरजाघर नहीं है, भारत में सोने के मंदिर है! ऐसे ‘सोने की चिड़िया’ कहलाने वाले भारत को विदेशी आक्रमणकारियों ने लूटा।
पूरे भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बंद करके अंग्रेजो ने इंग्लैंड से सामान लाकर भारत के बाजारों में भर दिया। भारत की लोकल इंडस्ट्री को तबाह कर दिया।
अंग्रेजो के जाने के बाद यह काम विदेशी मल्टीनेशनल कम्पनियां कर रही है। गोरे विकसित देशों के प्रभाव में चलने वाली WTO और IMF जैसी अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाएं भारत और अन्य विकासशील देशों को लूटने का माध्यम बनी हुई है।
विदेशियों से इस लड़ाई में ‘स्वदेशी’ एक ऐसा हथियार है जो आप, मैं और भारत की आम जनता उठा सकती है। भारत को ‘परम वैभव’ के शिखर पर स्थापित करने के लिए हम सब एक साथ आगे बढ़े, यही शुभकामना है।
भारत माता की जय।
~ स्वदेशी एजुकेटर की कलम से।