पिछले दिनों इन दो युवा महिलाओं का नाम सोशल मीडिया व अन्य मीडिया में छाया रहा है!डॉक्टर श्रेयांसि जो कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमेश पोखरियाल निशंक की बेटी है उसने आर्मी में डॉक्टर के नाते से कमीशन लेकर भर्ती हुई है! नेताओं के बच्चे आर्मी में नहीं जाते,इसको जूठलाते सांसद निशंक द्वारा सेना में बेटी को भेजने का उत्तम उदाहरण,इस परिवार ने प्रस्तुत किया है।
दूसरी तरफ अमेरिका की अच्छी नौकरी छोड़कर अब अपने भोपाल के निकट के गांव बरखेड़ी अब्दुल्ला में सरपंच के नाते से गांव का विकास करने में जुटी भक्ति शर्मा की भी सब तरफ चर्चा है!उसने ना केवल समग्र ग्राम विकास में बहुत अच्छे कदम उठाए हैं बल्कि बाल व महिला मंत्रालय ने उसे भारत की 100 प्रभावी महिलाओं में भी शामिल किया है!महिलाओं की इस प्रकार से सेना व विकास के कार्यों में सहभागिता यह शुभ संकेत है! किंतु भारतीय परंपरा में महिलाओं को शिक्षा व चिकित्सा के क्षेत्र में कार्य करना यह अधिक सुविधापूर्ण होता है!
मैं अपनी भतीजी डॉ ऋचा की इस बात से सहमत नहीं हूं कि महिलाओं को सब स्थान पर समान सहभागिता मिलनी चाहिए! किंतु जिन क्षेत्रों में उनका योगदान होना चाहिए उसमें सबसे प्रमुख है परिवार का संस्कार व परिवार की देखरेख! परिवार समाज व देश की अर्थव्यवस्था का भी आधार रहता है इसलिए महिलाओं को शिक्षा व भविष्य के क्षेत्र को चुनते हुए कौन सा विशेय चुनना यह सोचने की आवश्यकता है….