गत दिनों दिल्ली में हुए स्वदेशी मेले में कश्मीरी लाल जी व सिद्धार्थन जी के साथ!
आदरणीय भाइयों एवं बहनों!
कल मैंने बाबा रामदेव जी को एक पत्र लिखा था!उस पर बहुत अच्छी प्रतिक्रियाएं उपलब्ध हुई हैं!
आज सवेरे चंडीगढ़ में एक वरिष्ठ प्रचारक से चर्चा होने लगी वे बोले “मल्टीनेशनल कंपनीयों को टककर तो दी ही है पतंजलि ने?”
तो मैंने उन्हें कहा “धारणा एक बात है! किंतु तथ्य कुछ और भी हैं! जैसे पतंजलि के एक उत्पाद दंतकांति को ही लें..पतंजलि ने कितना मार्केट शेयर किससे लिया है! तो देखिए नीचे की टेबल
2010. 2017
१.कालगेट ग्रुप 55.1% 51.5%
२.क्लोज अप, 22.0%. 20.5%
पैप्सोडैंट
३.डाबर (लाल) 16.0% 17%
४.दन्तकान्ति। 0.7% 08%
५.प्रोमिस,बबूल 6.2%। 03%
नीम व अन्य
छोटे-छोटे ब्रांड
इससे यह स्पष्ट है कि दंत कांति ने कॉलगेट,क्लोजअप को यदि 5% की मार मारी है तो 3% की मार उसने छोटे स्वदेशी उत्पादों को भी मारी है!
दूसरी तरफ योग भारत की शक्ति है!इसमें हम ही दुनिया में सबसे आगे हैं! कोई 6 लाख लोग योग से रोजगार पा रहे हैं! जबकि 14 लाख लोग और चाहिएं! फिर दुनिया भर में लगभग 10 लाख योग शिक्षक चाहिए!
मोदी जी ने यूनाइटेड नेशन में योग को पास करवाकर इसको दुनिया भर में चरम पर पहुंचा दिया है ! इससे योग का बड़ा बाजार दुनिया भर में बन गया है! इस समय योग की दुनिया भर में 90 अरब डालर की मार्केट है!
किंतु इसमें से अभी सबसे अधिक अमेरिका ही कमा रहा है! कोई 35 अरब डालर! हमारा हिस्सा भी ठीक है! पर संभावना बहुत अधिक है!
जैसे अरब देश दुनिया में तेल भेजते हैं,चीन सस्ता माल भेजता है,ऐसे ही हम दुनिया भर में योग,आयुर्वेद व पंचगव्य निर्यात कर बड़ी कमाई कर सकते हैं!
क्योंकि अभी भी भारत,दुनिया भर में सस्ती व गुणवत्ता वाली दवाइयों के देश के नाते से जाना जाता है!और हम उससे अरबों रुपए कमा भी रहे हैं!
इसी भावना से ही कल का पत्र लिखा था!
चार पांच साल पहले हर पार्क में लोग योग करते दिखते थे! पर अब नहीं दिखते!क्योंकि कोई उस विषय पर लगातार ध्यान दे ही नहीं रहा!बाबा जी भी लग गए दूसरे कामों में!
तो योग को बढ़ाना यह प्रमुख विषय है इसमें हम सब ध्यान केंद्रित करें! यही इस सब का सार है! सहमत हैं?