कश्मीरी लाल जी के साथ जामुन बेचने वाला जितेंद्र

कल मैं व कश्मीरी लाल जी विजयवाड़ा में होने वाली प्रांत प्रचारक बैठक के लिए जा रहे थे। ट्रेन में एक जामुन बेचने वाला आया। कश्मीरी लाल जी को जामुन पसंद हैं, तो मुझे ऐसे लोगों से बातें करना।
मैंने पूछा “अरे भाई! बैठो जरा! अपना नाम बताओ? कितनी कमाई करते हो? हो,कहां के? कुछ बचता भी है कि नहीं? पुलिस वाले तंग तो नहीं करते?”
पहले तो वह थोड़ा शरमाया।पर बाद में खुल गया।
वह बोला “मैं वैसे विदिशा का रहने वाला हूं। कश्यप कछुआ जाति से, नाम मेरा जितेंद्र है। पिछले 15-16 साल से,जब मैं छोटा था,तब से अमरूद, जामुन यही बेचता हूं। प्रतिदिन 12सौ से लेकर ₹1500 तक की सेल कर लेता हूं।पर क्या करूं साहब! आजकल जुर्माना 12सौ से बढ़कर ₹3500हो गया है। जेल अलग जाना पड़ता है।इससे बचने के लिए पुलिस वालों को 400 से ₹500 तक देने पड़ जाते हैं। फिर भी मैं 500 ₹600 की कमाई कर ही लेता हूं।”
मैंने पूछा “घर में कौन-कौन है?”
उसने कहा “एक छोटी बहन और छोटा भाई है। छोटे भाई को पढ़ा रहा हूं ताकि वह पढ़ लिख जाए मैं तो आठवीं भी नहीं पास कर सका। बहन की शादी कर दी, इसी कमाई में से। और इसी से ही भोपाल में दो छोटे फ्लैट ले लिए हैं।गांव से माता-पिता को वहां ले आया हूं। क्योंकि हमारी जमीन नहीं थी।”
मैंने कहा “तुम 28-30 साल के लगते हो,शादी क्यों नहीं की?”
“साहब पहले तो बहन की शादी करनी थी छोटे भाई को पढ़ाना था किंतु अब सोचता तो हूं,पर डरता भी हूं कि अगर कोई लड़की ऐसी आ गई जो मेरे मां-बाप की सेवा ना करे तो?”
“इसलिए जल्दबाजी में नहीं हूं। मां-बाप ही मेरा सब कुछ है।वे सुखी हैं,मैं तो इसी से ही खुश हूं।बाकी मेरा तो भगवान रक्षा करता है, शादी भी हो ही जाएगी।”
मैनें उसको शाबासी तो दी पर उसकी बातें सुन मेरी आंखें भर आईं।

बाद में हम आपस में बात करने लगे कि अगर सरकार ऐसे लोगों को सर्टिफाइड कर दे तो यह लोग अपना रोजगार स्वयं कमा ही रहे हैं,कम से कम पुलिस वालों से तो बच जाएं।
स्वदेशी को इस विषय में कुछ करना ही होगा। हमने मन बनाया।
जय स्वदेशी जय भारत