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4 दिन पूर्व जब मां से मिला…माँ बेटे की गहन मंत्रणा!

4 दिन पूर्व मैं अंबाला गया। बड़े भाई नरेश जी व मां वहीं हैं। जानकारी मिली थी कि वहां मां अस्वस्थ हैं। तो कश्मीरी लाल जी और मैं, पास इत्यादि की व्यवस्था करके वहां पहुंचे।
खैर! तब तक वह कुछ ठीक हो गई थीं। आज जब सुना कि अंतरराष्ट्रीय मदर डे है तो सोचा आज मां पर ही चिट्ठी लिखें।

केवल हिंदू समाज में ही नहीं पूरी मानव जाति में, और मानव जाति ही क्यों, जीव जंतुओं में भी मां का स्थान अत्यंत पवित्र व स्नेह पूर्ण माना गया है। मां-पुत्र (संतान) का संबंध यह सर्वोच्च है। माता को हमारे यहां प्रथम गुरु भी कहा है और मां क्योंकि श्रद्धा व प्रेम का केंद्र रहती है इसलिए जिस चीज के प्रति प्रेम और श्रद्धा व्यक्त करनी हो, उसको हमारे यहां मां से जोड़ा। जैसे गंगा मैया, गीता, गऊ माता,… और फिर भारत माता तो है ही।

अब अमेरिका यूरोप या दुनिया भर में मां के प्रति आस्था तो है पर वैसा उच्च भाव नहीं जैसा हमारे यहां है, इसलिए वहां पर वृद्धाश्रमो की संख्या बढ़ी हुई है। और अपने अंदर की इस कमी को (निम्नभाव) पूरा करने के लिए ही बीसवीं शताब्दी के शुरू में Anna Jarvis नाम की महिला ने (अमेरिका में) यह मदर डे शुरू किया।

यद्यपि इसके बाजारीकरण हो जाने के कारण से वह मरने से पूर्व अपने इस प्रयत्न पर दुखी भी रही।
भारत विश्व को भी एक परिवार मानता है और पश्चिमी सोच में परिवार भी बाजार के नाते से है। और मदर डे पर भारी ‘सेल लगाना’… इसकी सोच बनती है।
जो भी हो भारत के लोगों को गर्व है कि उन्होंने मां का आदर्श रूप अपने जीवन में सदा रखा है आज इतना ही!

~सतीश कुमार