थाने में बैठा दिशांत पटेल सन्यासी वा उसके मां-बाप व सगे संबंधी। कुरुक्षेत्र में गीता विद्यालय ने यों मनाया स्वदेशी सप्ताह।
तीन-चार दिन से मीडिया में दिशांत पटेल जोकि अहमदाबाद का रहने वाला इंजीनियर है व हरे रामा हरे कृष्णा इस्कॉन का सन्यासी हो गया है,किंतु उसके मां बाप थाने में पहुंच गए! इसको लेकर इंडिया टीवी सहित अनेक चैनलों पर इसकी स्टोरी चल रही है!
2 वर्ष पूर्व प्रशांत संख्याल भी इसी प्रकार से इसी मिशन का सन्यासी हो गया तो उसके मां-बाप भी थाने पहुंच गए!
एक दृष्टि से तो हिन्दू समाज के लिए गर्व की बात है की आज के युग में भी अछे कालेज से इंजीनयरिंग करने के बाद भी सन्यासी निकल रहे हैं!
यहाँ एक अहम प्रश्न है,जिसका निर्णय बहुत कठिन है बेटा सन्यासी तो हुआ…किंतु मां-बाप उसको स्वीकार नहीं कर पाए और करते-करते अंततः थाने कचहरी तक पहुंच गए! किंतु बालिग होने के कारण से कुछ हुआ नहीं,इसमें दोनों को ही सोचने का विषय है!
मां बाप को तो सोचना चाहिए कि यह तो प्रसन्नता का, त्याग का विषय है!बच्चे से अपेक्षा करें कि वह बुढ़ापा में काम आएगा,बहुत उत्तम तो नहीं है और उधर सन्यासी जाने वाले को भी ध्यान रखना होगा की प्रक्रिया ऐसी रहे की मां बाप चाहे कठिनाई से ही सही सहमति दे दें!
आखिरकार आदि शंकराचार्य ने भी तो मां से ऐसे ही अनुमति ली थी।आप सब भी अपना विचार बताइए?
क्योंकि पटेल यह 4 दिन पहले ही सन्यासी निकला है मां बाप रो रहे हैं वह कह रहे हैं कि हरे रामा हरे कृष्णा वालों ने हमारे बेटे का ब्रेनवाश किया है!किंतु मां बाप को अपनी गहराई से सोचना चाहिए।
स्वामी सत्यानंद जी की अमृतवाणी में आता है
मात पिता बांधव सुत दारा
धन जन साजन सखा प्यारा
अंतकाल दे सके न सहारा
राम नाम तेरा तारणहारा…
तो मां-बाप को बेटे का नहीं राम के सहारे से ही अपना जीवन यापन करने की बात सोचनी चाहिए!
आपका क्या विचार है?