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माननीय कश्मीरी लाल जी

अपने अखिल भारतीय संगठक माननीय कश्मीरी लाल जी हिमाचल प्रांत सम्मेलन के बाद चंडीगढ़ में ठहरे।
विजयदशमी के दिन पथ संचलन कार्यक्रम में उनका संबोधन होना था और उससे एक दिन पहले पूरा दिन मुझे उनके साथ रहने का सौभाग्य मिला।
शाम को चंडीगढ़ टोली की बैठक के अलावा अन्य कोई कार्यक्रम नहीं था, तो उन्होंने एक कार्यकर्ता से मिलने की इच्छा जताई। क्योंकि मै बाइक पर उनके पास आया था तो मैंने कहा, “ठीक है, मै कैब बुक कर देता हूं।”

उन्होंने पूछा, “आपके पास बाइक है ना? तो हम बाइक पर ही चलते है, कैब के लिए क्यों फालतू खर्च करना। अच्छी हवा भी मिलेगी और बातचीत करते हुए चलेंगे।”
इतना सरल व्यक्तित्व!
स्वदेशी कार्यकर्ता अभिमन्यु जी चंडीगढ़ में ही कोचिंग सेंटर चलाते हैं। वहां पहुंच कर कश्मीरी लाल जी स्वयं यह सीख रहे थे की स्मार्ट क्लासरूम कैसे ऑपरेट करते हैं। और मै यह सोच रहा था कि इस उम्र में भी नई नई चीजों को सीखने की कितनी उत्सुकता उनके अंदर है।

शाम की बैठक के बाद मुझे साप्ताहिक मिलन में भाग लेने एक कॉलेज में जाना था। मैंने कश्मीरी लाल जी से भी साथ चलने के लिए निवेदन किया।
क्योंकि स्वयंसेवकों का सप्ताहिक मिलन था, तो विजयादशमी के महत्व पर चर्चा शुरू हुई। जहां पहले चर्चा के लिए समय कम बचा था लेकिन फिर भी एक घंटा कैसे बीता, पता ही नहीं चला।
हर बात सटीक उदाहरणों सहित कहना और वो भी स्त्रोत के साथ, अवश्य ही सीखने लायक बात थी कि व्यस्त दिनचर्या में से भी अध्ययन के लिए समय निकाला जा सकता है।

उसके बाद एक स्वयंसेवक के घर चाय के लिए जाना हुआ तो उनके बेटे से कश्मीरी लाल जी की बातचीत शुरू हुई। जब उन्होंने बच्चे से उसकी ‘Hobbies’ पूछी तो उसके जवाब में ‘Politics’ भी था।
स्वाभाविक तौर पर इस बारे में चर्चा आगे बढ़ी और मै यह देख रहा था कि उस बच्चे की बातों को और प्रश्नों को भी वे कितने ध्यान से सुन रहे थे।
एक और सीख मिली कि एक अच्छा वक्ता वही हो सकता है, जो एक अच्छा श्रोता भी है।

वापसी में बाइक पर बैठे हुए भी भोजन की आदतों से लेकर, स्वदेशी के प्रचार करने तक, बहुत कुछ नया सीखने को मिला।
दिन भर की भागदौड़ के बावजूद भी उनके चेहरे पर थकान का कोई चिन्ह् नहीं, प्रचारक जीवन से ही ऐसी प्रेरणा मिल सकती है।
इतनी उम्र में भी जब अपने अधिकारियों को देश के लिए इतना काम करते देखता हूं, तो बस एक ही बात ध्यान में आती है, “भरा नहीं जो भावों से, बहती जिस में रसधार नहीं। हृदय नहीं वो पत्थर है, जिसमें स्वदेश का प्यार नहीं।”

~ साहिल तनेजा
स्वदेशी एजुकेटर चंडीगढ़