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कश्मीरी लाल जी एवं अन्य कार्यकर्ता दिल्ली की एक बस्ती में राशन वितरण करते हुए

आज मैंने सतीश जी से फोन पर बातचीत की, “इस समय पर दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा क्या चल रही है?”
उन्होंने कहा कि, “आपको पता है क्या? 45 देश अब हमसे दवाईयां मांग रहे हैं। और भारत ने कहा है कि हमारे पास न मन की कमी है न स्टॉक की। हम सभी की सहायता करेंगे।”

मैंने पूछा, “अच्छा! ऐसा कैसे हो गया?”
तो उन्होंने कहा, “सुनो, अभी तक 13 देशों को हम भेज भी चुके और 35 लाख टैबलेट तो अकेले अमेरिका को दी हैं। और जानते हो, ट्रंप ने क्या कहा है? कि अमेरिका अपने दोस्त भारत की मदद को कभी नहीं भूलेगा।” साथ ही इजरायल के प्रधानमंत्री और मालदीव ने भी भारत का आभार व्यक्त किया है।
मैंने कहा, “जी ये तो बड़ी बात है।”

तो उन्होंने कहा, “इससे भी बड़ी बात यह है कि भारत अब दवाई के अलावा गेंहू भी निर्यात करने की तैयारी कर रहा है। हमारे पास इतना विशाल मन है और वसुधैव कुटुंबकम् का विचार है। हम तो पूरे विश्व को अपना परिवार मानते हैं। इसलिए हम केवल अपने मरीजों और अपनी जनता की ही चिंता नहीं कर रहे, अन्य देशों के मरीजों के लिए भी दवाइयां और अनाज भेज रहे हैं।”
(यह अलग बात है कि वे इसकी पेमेंट कर रहे हैं)

मैंने कहा कि इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है?
उन्होंने कहा कि, “आप देखते जाइए, एक बार इस बीमारी से भारत व विश्व निकल आये, सारी दुनिया ही भारत को सम्मान व श्रद्धा से देखने लगेगी, जैसे 12वी-13वी शताब्दी से पहले देखती थी।”

तभी मेरे कानों में अपना पुराना गीत गूंजा
“विश्व में गूंजे भारती, जन जन उतरे आरती
धन्य देश महान, धन्य हिंदुस्तान….”

~साहिल तनेजा