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वंदेभारत ट्रेन में सफर करते हुए

आज मैं नई दिल्ली से कानपुर जा रहा हूं,प्रवास पर। पहली बार वंदे भारत ट्रेन में बैठने का अवसर आया। 129 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से चल रही है!केवल 4:08 घंटे में कानपुर पहुंचा देगी।अंदर जलपान सहित विमान के दृश्य का अनुभव करा रही है।सब कुछ साफ सुथरा…उत्तम।

गत महीने जानकारी दी थी, कि ऑस्ट्रेलिया में भारत में बनी छह मेट्रो ट्रेन काम कर रही हैं। वहां उसे मोदी ट्रेन भी बोलते हैं।
12650 रेलगाड़ियों के साथ यह दुनिया का दूसरा बड़ा रेलवे नेटवर्क है।14.5 लाख सीधे कर्मचारी हैं।3 करोड यात्री प्रतिदिन इसका उपयोग करते हैं। गरीब व सामान्य आय वर्ग लोगों के लिए बड़ी राहत है, रेलवे।

यह ठीक है कि भारत के गरीब लोगों की स्थिति को देखते हुए स्लीपर व जनरल बोगी के किराए बहुत थोड़े रखे हुए हैं इससे रेलवे को कुछ घाटा उठाना पड़ता है,पर वह दिक्कत नहीं।
प्रमुख बात है कि भारतीय रेल का सब कुछ, डिजाइन से लेकर उत्पाद बनने तक, इंजन से लेकर डिब्बे व कलपुर्जे तक, सब कुछ भारतीय याने स्वदेशी ही बनता है। इतने बड़े देश को जोड़ने में भी रेलवे का योगदान है।

लाखों नहीं,करोड़ों लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी इसके कारण से मिला हुआ है।सकारात्मक दृष्टि से देखें तो भारत का एक बड़ा सफल स्वदेशी प्रकल्प है..भारतीय रेलवे।