Image may contain: 10 people

बैठक में कश्मीरीलाल जी के दायीं और नरसिंमराजू व विजयवाड़ा टीम के अन्य कार्यकर्ता

कल हम विजयवाड़ा बैठक के लिए पहुंचे। वहां के अपने प्रांत संयोजक हैं नरसिंहम राजू।
जब हम उनके घर पर बैठे तो उन्होंने बताया ” मैं नक्सली हिंसा से ग्रसित नेल्लूर जिले का रहने वाला हूं। पिताजी गरीब किसान थे। पॉलिटेक्निक की पढ़ाई करके ₹1000 में एक जगह नौकरी कर ली। तनखा बहुत कम थी और नौकरी करने की बहुत इच्छा भी नहीं थी।”
इसलिए एक रिश्तेदार के साथ प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू किया और 1 महीने में ही ₹30000 कमा लिए।किंतु 6 महीने तक उनके साथ काम करते हुए मेरे ध्यान में आया कि इस काम में बहुत कुछ अनैतिक भी है। सो मेरा मन उसमें नहीं रमा।नौकरी तो करनी ही नहीं थी।”
तब मैने सोचा कोई अपना ही काम करूंगा।कुछ पैसे तो मैने बना ही लिए थे।
उसी थोड़ी कमाई से मैंने एक केमिस्ट की दुकान खोल ली।क्योंकि पढ़ाई करते समय, अपने एक रिश्तेदार जो कि फार्मेसिस्ट थे, उनसे काम की मोटी जानकारी ले ली थी।”
“फिर तो इसके बाद मैंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।”

“मेहनत, लगन व सूझबूझ से 4 साल बाद ही दो पार्टनर मिला कर दो अलग दुकानें खोल ली। बीच में कठिनाइयों ने भी परीक्षा ली,किंतु मैं डटा रहा और हैदराबाद में जाकर हाथ आजमाया।”
“गत 20 साल में अब 50 केमिस्ट की दुकानें खोल ली हैं। सब में पार्टनरशिप रखी है। और अब तो मैंने स्टील मोल्डिंग की एक फैक्ट्री भी शुरू कर ली है।”
मैने पूछा-यह क्यों किया?
मैने डिप्लोमा मैटलर्जी साईंस में किया था,सो तब से मेरी ईच्छा थी,जो अब पूरी हो पायी है।

जो कभी ₹1000 की नौकरी करता था,अब वह 400 लोगों को रोजगार दे रहा है,80करोड़ का उसका टर्नओवर है।बहुत संतुष्ट है। धार्मिक वृत्ति का है। और सबसे बड़ी बात है,स्वदेशी का प्रांत संयोजक है।हम जो रोजगार के लिए कह रहे हैं कि “don’t be job seeker,be job provider” उसका अनुपम उदाहरण है ~नरसिंहराजू!