हमारे अभियान का एक पोस्टर!
वैक्सीन के मामले में भारत लगातार विजय की तरफ बढ़ रहा है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है। भारत अपने 138 करोड़ लोगों को वैक्सीन लगाते हुए विश्व की 786 करोड़ जनता को वैक्सीन लगाना।
भारत विश्व की फार्मेसी है। विश्व की 62% वैक्सीन यहां बनती हैं। हमारे डॉक्टर-वैज्ञानिकों ने कोरोना वैक्सीन का शोध भी एक वर्ष से कम में कर लिया। इस समय भारत में 7 कंपनियां बना रही हैं, तीन अगले महीने तक और शुरू कर देंगी। विश्व की सर्वोत्कृष्ट व सस्ती।फिर भारत अपने लिए 200 करोड़ वैक्सीन तो अक्टूबर-नवंबर तक ही बना लेगा।
उधर विश्व व्यापार संघ (WTO) में अक्टूबर 2020 में ही पहल करते हुए भारत ने प्रस्ताव लाया और उस पर आग्रह बनाए रखा।भारत सरकार के, भारत में स्वदेशी अभियान के व विश्व के सहयोगी अभियान के दबावों के परिणाम स्वरुप मई के प्रथम महीने में अमेरिका माना, फिर यूरोप के कुछ देश, फिर यूरोपीयन पार्लियामेंट ने माना और अब जापान, चीन व जर्मनी ने भी मान लिया है। यहां तक कि डब्ल्यूटीओ में परसों हुई वार्ता में उन्होंने इस पर तुरंत चर्चा कर जुलाई अंत तक घोषणा करने की बात भी लगभग मान ली है।
इतना ही नहीं G7 की इंग्लैंड में कल मीटिंग होने से पहले ही उन्होंने 100 करोड़ वैक्सीन विकासशील (गरीब देशों) के लिए देना मान लिया है।
अब भारत को घोषणा करनी होगी की विश्व को 200 करोड़ डॉज हम देंगे व संपूर्ण दुनिया को सुरक्षित करेंगे। यह बड़ा नैतिक दायित्व भारत ही ले सकता है। क्योंकि भारत ही कहता है विश्व एक परिवार है, “वसुधैव कुटुंबकम” अन्यथा पश्चिमी-अमीर देश तो कहते हैं “विश्व एक बाजार है।”
भारत को विश्व नेतृत्व करने का समय आ गया है और भारत तेजी से उस भूमिका को निभाने भी लगा है।
~सतीश कुमार