एक “LIFE WITH A MISSION” श्रीमती सरोज़ कुन्द्रा का! मैं कल सायं खन्ना(पंजाब)में स्वदेशी अभियान की एक गोष्ठी हेतु गया! पर दिन में वहाँ के हिन्दी पुत्री पाठशाला में भी मेरे बोलने का कार्यक्रम वहाँ कार्यकर्ताओं ने रख दिया! साफ़ सुथरा, अच्छी,सुंदर बिल्डिंग…हर प्रकार की आधुनिक प्राईवेट स्कूल की सुविधाएँ ! पर पूछने पर पता चला कि यहाँ की अधिकांश छात्राएँ अतिनिम्न आयवर्ग की हैं ! “फिर इतना अच्छा, 1100 विद्यार्थियों का बड़ा स्कूल चल कैसे रहा है?” मैंने पूछा! सरोज कुन्द्रा जी बोलीं- सारा खन्ना देता है…लोगों के पास जा-जा कर किसी से 2 किसी से 3या 4 बच्चों की फीस माँग लाती हूं कनाडा में रह रहे मेरे भाई-भाभी भी बहुत सहायता भेजते रहते हैं” ज़रूरत पड़ी तो कुछ पुरानी अध्यापिकाओं ने एक मास की पैशंन भी दी!मेरा तो सब कुछ इसी हेतु है! “कब से आप यह सब कर रही हैं?” उतर मिला “49 साल से” ” क्या….? मैं थोड़ा अधीर हुआ! वे बोली “मैं 25 साल की थी, जब इस विद्यालय में आई,प्रधानाचार्या रही और अब 14 साल से मैनेजर हूँ! इन बच्चियों के लिए ही जीवन है !इनके लिए किसी के भी आगे हाथ पसारने में मुझे कोई संकोच नहीं” वे सवेरे 1 घटें पहले आ जाती हैं,फिर कब शाम या रात हुई…बस एक ही लक्ष्य!आज की प्रिंसिपल भी उन्ही की राही हैं-रजनी वर्मा! जो कभी 32 वर्ष पहले नर्सरी कक्षा में बच्ची के नाते आईं तो आज….! सब सुनकर मेरे मुहं से एक ही शब्द निकल रहा था “धन्य, धन्य…..