Image may contain: 1 person, standing

Image may contain: crowd, grass and outdoor

नागपुर में विजयदशमी पर एचसीएल के शिव नाडर को सम्मानित करते मोहन जी भागवत व संघ स्वयंसेवकों का एकत्रीकरण

गत विजयदशमी के दिन, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह जी जब फ्रांस में राफेल विमान लेने गए, तो वहां उन्होंने ओम लिखकर, नारियल फोड़कर व टायरों के नीचे नींबू रखकर पूजा अर्चना की।
यह सामान्य धार्मिक परंपरा है,जो इसी बार ही नहीं हुई, बल्कि सेना वह अन्य संस्थानों पर पहले भी होती है।
इसरो के प्रत्येक राकेट के उड़ाने से पहले लगभग यही सब कुछ होता है और वैज्ञानिकों का भी यह विश्वास है कि धार्मिक प्रक्रिया भी सात्विक उद्देश्य की सफलता में सहायक होती है।

किंतु देश का एक (कु)बुद्धिजीवी वर्ग है जो ना केवल आलोचना में लगा है, बल्कि इससे शर्मसार भी हो रहा है। दुनिया में कोई भी देश अपनी आस्थाओं को छोड़ता नहीं।
अमेरिका में बाइबल की शपथ लेकर ही कोई राष्ट्रपति कार्य प्रारंभ करता है, कुछ ऐसा ही सब इस्लामिक देशों में भी होता है, पर कहीं पर कोई विवाद नहीं होता बस हमारे यहां ही होता है।

इसका एक कारण है अंग्रेजों द्वारा हिंदू जीवन मूल्यों परंपराओं के प्रति अनास्था उत्पन्न करने वाला साहित्य रचना व बाद में उसे वामपंथियों द्वारा पोषित किया जाना। किंतु अब भारत व हिंदू समाज जाग रहा है। राष्ट्रीयता का सूर्य उदय हो रहा है। अपनी परंपराओं को ना भूलने का नई पीढ़ी स्वप्न संजो रही है।
भारत जाग रहा है। उसे जागना ही है। भारत नहीं पूरे विश्व की आवश्यकता है कि भारत जागे और विश्व का मार्गदर्शन करे..