स्वदेशी के सुदंरम जी व वर्गीज़ जी..साथ में प्लाचीमाड़ा के प्रधान व अम्माँ के प्रपौत्र !
पालाघाट(केरल में) की यह अम्माँ ने जूट से सामान बनाने व महिलाओं को काम देने की सोची पर महिलाओ द्वारा तैयार माल कंपनियों के ब्राडंड माल के सामने टिक नहीं रहा था! तो वे इस हस्तकला के सामान को 1960-62 में,जब कोई साधन न के बराबर थे,वहाँ से कोई150 कि:मी:दूर कोयम्बटूर ले जाकर बेचने लगीं!इससे अन्य महिलाओं का भी उत्साह जगा और इस तरह पालाघाट का यह कुटीर उद्योग जो ज़्यादातर महिलाओ पर निर्भर है चल ही नहीं निकला आज तक भी चल रहा है!उन्के जज़्बे को सलाम करते हुए सरकार व कई संस्थाओं ने उन्हें सम्मानित भी किया है!..उनकी पाँच पीढ़ियों में से 15 परिवार अभी भी इस काम में हैं…मेरा सौभाग्य की उनके चरण छूने का अवसर पाया…
*वहीं पास में ही प्लाचीमाडा है!जहाँ पर प्रसिद्ध कोकाकोला विरोधी सफल अभियान हुआ! उस अभियान के मुखिया ने मुझे बताया “कोकाकोला का प्लांट यहाँ कोई 20 वर्ष चला! उसे चार स्थानों से ही पानी निकालना था व कैमिकलयुक्त पानी हेतू ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाना था! पर कंपनी ने कोई 60स्थानो से पानी खींचा व गंदे पानी को वापिस ज़मीन मे ही डाल दिया! इससे प्लाचीमाड़ा गाँव व आसपास का सारा भूमिगत जल दूषित हो गया! तो सबने मिलकर आंदोलन किया! कठिनाइयाँ तो बहुत आईं,पर अंततः हम प्लांट बंद करवाने मे सफल हुए।” दुनिया की बड़ी कंपनी को भारत की जनशक्ति के सामने झुकते हुए सबने देखा..जय हो! “किन्तु मुआवज़े की बात आई तो कम्युनिस्ट व कांग्रेस की सरकारें बहानें ही मारती आई हैं…पर हम भी लगे हैं,छोड़ेंगे नहीं” …प्रधान की संकल्पशक्ति को प्रणाम !