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कल मैं भिवानी में अपने प्रो: राजकुमार मित्तल वाइस चांसलर (सीबीएलयू-भिवानी) के निवास पर था। वे मुझे अपनी बागवानी दिखाने लगे। तभी उन्होंने दिखाया की पपीते के दो पेड़ जो एक ही दिन लगाए गए थे, एक ही बगीचे में, किंतु एक पर बहुत अच्छे पपीते तैयार हो गए थे,जबकि दूसरा किसी तरह बस, खड़ा था, आधा मुरझाया हुआ, पीला ही हो रहा था।

मैंने पूछा “यह फर्क कैसे है?”
वे कहने लगे “एक ही जगह से बीज लाया,एक ही माली ने लगाया, एक ही जमीन है..20 फुट का अंतर है,पर इतना फर्क! समझ नहीं आ रहा?” बाकी तीनों कार्यकर्ता भी अनुमान लगाने लगे।
तब एक ने कहा “फल वाला पौधा, सदा सकारात्मक सोचता होगा और दूसरा नकारात्मक!”

यद्यपि इसपर सब हंस पड़े पर यह जीवन का सत्य तो है ही। जो व्यक्ति हर परिस्थिति में सकारात्मक रहता है, वह फलता फूलता है, सफल होता है। और जो नकारात्मक सोच वाले लोग रहते हैं वह आगे बढ़ ही नहीं पाते। उन्हें गली की हवा से लेकर प्रधानमंत्री तक सब से शिकायत ही रहती है। जबकि सकारात्मक आदमी हंसते खेलते पूरी शक्ति से काम करता है और जिंदगी में सफलता प्राप्त करता है।
सकारात्मकता केवल एक गुण नहीं, बल्कि जीवन जीने की शैली है, हम ज़रा जी कर देखें, जीवन आनंद व सफलता से भर जाएगा।