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पुष्कर बैठक का दृश्य

गत दिनों राजस्थान के पुष्कर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उससे प्रेरित 35 अन्य संगठनों की तीन दिवसीय बैठक थी।सब प्रकार के विचार विमर्श हुए। देश की परिस्थिति कैसी है?आगे क्या करना चाहिए? इसका चिंतन हुआ।
किंतु एक प्रश्न लाखों लोगों के मन में है कि आखिर यह संघ परिवार के संगठन चलते कैसे हैं? क्योंकि इन संगठनों के निर्णय में तो संघ जाता नहीं,तकनीकी रूप से कोई संघ का संबंध भी नहीं। किंतु गत्त 90 वर्षों से यह संघ परिवार के संगठन बढ़ते ही जा रहे हैं,इसका कारण क्या है?
गत दिनों भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल चीन गया।पार्टी से पार्टी संपर्क का कार्यक्रम था। चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ने इनसे कई सवाल पूछे “भाजपा की 18करोड़ सदस्यता कैसे हो गई? आप बूथ मैनेजमेंट कैसे करते हो?उसी में ही एक उन्होंने प्रश्न पूछा “यह संघ परिवार आपके साथ इतने बड़े प्रमाण पर सहयोग कैसे करता है, क्यों करता है?”
तो इन सब का उत्तर है संघ की देशभक्ति की विचारधारा-हिंदुत्व। इस की कार्यपद्धति जिसमें व्यक्ति संस्कार व प्रेरणा का महत्व है कंट्रोल का नहीं।और सबसे बड़ी बात! सब संगठनों के कार्यकर्ताओं के आपस के प्रेम पूर्ण संबंधों के कारण उत्पन्न एक दूसरे पर विश्वास।
यही आधार है इस बढ़ती हुई संघ सृष्टि का। हां!यह बात अंदर वालों को ही समझ में आ सकती है, बाहर वालों को समझना बहुत मुश्किल है।~ जय हो!