कल सायंकाल जब मैं कुरुक्षेत्र में प्रोफेसर बलदेव जी (VC आयुष) के घर पर था तो उनका ड्राइवर मिठाई का डिब्बा लेकर आया और मेरे पैर स्पर्श करने लगा।

मैंने पूछा “क्या है भाई?” तो उसने कहा “सर! मैंने एक गाड़ी ली है। मैंने कहा “अरे तू तो यहां गार्ड है तो गाड़ी कहां से ली, कौन चलाएगा?”

तो उसने कहा “सर मैंने पिछले एक साल में ₹1लाख बचा लिया, कुछ घर से लिया और तीन लाख की डाउन पेमेंट करके सात लाख की गाड़ी ले आया हूं।”

मैंने कहा “उसको चलाएगा कौन?”
वह कहने लगा “मैं तो चला नहीं सकता, क्योंकि यहां यूनिवर्सिटी में कार्यरत हूं किंतु मैंने एक ड्राइवर रख लिया है। कमाई ठीक होने की उम्मीद है।”

आज सवेरे दूसरा ड्राइवर सौरभ आया और उसने भी बताया कि कल ही उसने भी दूसरी गाड़ी ली है। लगभग यही बात उसने भी कहीं।
मैंने पूछा तुम दोनों को अपना रोजगार तो अभी पक्का नहीं है और तुमने गाड़ियां लेकर ड्राइवर रख लिए हैं?

तो उन्होंने कहा “हां! सर हमारे को प्रोफेसर साहिब ने ही प्रेरणा दी है की हमें नौकरी ढूंढने वाला नहीं, नौकरी देने वाला बनना है।'”

हम अपनी भी ₹20-22000 की कमाई कर रहे हैं और हमने 15-15000 के ड्राइवर भी रख दो को रोजगार दे भी रहे हैं।
मेरे को सुखद आश्चर्य हुआ यह दो लड़के जो स्वयं (बाहर की भाषा में) बेरोजगार हैं क्योंकि वह कॉन्ट्रेक्ट पर लगे हुए हैं और उन्होंने अपना ही नहीं दो अन्य को रोजगार देने का भी काम कर दिया है।

तो मैंने उन दोनों का मुंह मीठा किया,शाबासी दी,और VC व अपने साथ फोटो खिंचवाते हुए कहा “भारत का पहला रोजगार सृजक सम्मान कार्यक्रम हो गया

~सतीश