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आज सवेरे 5:00 बजे मुझे लखनऊ से दिल्ली के लिए गाड़ी पकड़नी थी। मैंने रात को ही ओला बुक करा दी। ठीक 4:20 पर उसी ने मुझे फोन कर कहा कि मैं आ गया हूं। बाहर बारिश थी,लेकिन मैं निश्चिंत था।

टैक्सी में बैठे तो मैंने ड्राइवर से पूछा “क्या नाम है भाई! कब से ओला में गाड़ी चला रहे हो?”
उसने कहा ‘मेरा नाम सुरेश है, बाराबंकी का हूं। पहले एक ठेकेदार की गाड़ी चलाता था केवल ₹9000 मिलता था और वह बीच-बीच में डांटता वा गालियां भी देता था। 6 साल नौकरी करके, मैंने बहुत सोच समझकर एक रिस्क लिया। कुछ उधार लेकर मैंने अपनी कार ले ली और ओला में लगा ली। अब मेरी किश्त व गैस आदि का खर्चा देने के बाद भी 17-18000₹ की मासिक कमाई हो ही जाती है।
मैं सोचने लगा नई टेक्नोलॉजी का उपयोग हमारे सामान्य युवक अपनी आय वृद्धि व स्वरोजगार हेतु भी कर सकते हैं… सुरेश की तरह। बस थोड़ी हिम्मत, करने की बात है।

मैंने पूछा”नौकरी और इसमें कोई और फर्क है क्या?” वह बोला “साहब बड़ी बात है, अब मैं मालिक हूं! किसी की डांट नहीं खाता। जब चाहूं जितना काम करूं।फसल के सीजन के दिनों में गांव चला जाता हूं, कोई दिक्कत नहीं।
फिर मैंने पूछा “बच्चे कितने हैं? कोई नशा पता तो नहीं करते? कुछ धर्म कर्म करते हो क्या?”
तो वह बोला “राम जी की कृपा से तीन बच्चे हैं। तीनों बड़े अच्छे और सच्चे हैं। कभी नशा पता किया नहीं बाकी राम जी की तो यह सारी दुनिया ही है।उसका जाप किए बिना तो मैं घर से गाड़ी निकालता ही नहीं।”
मैंने उसके बच्चों के लिए ₹10 अधिक देते हुए पेमेंट की वो मेरी तरफ देखने लगा। फिर मैंने उसको कहा “मेरे साथ सेल्फी खिंचवाओगे?” उसकी मुस्कुराहट मुझे हजारों रुपए दे गई। जय स्वदेशी जय भारत..