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जादू वाला नल: आज जब मैं अहमदाबाद के एक चौराहे से निकल रहा था तो वहां हवा में लटकता हुआ एक नल, जिससे पानी निकल रहा था,देखा।
किंतु पूछने पर ध्यान में आया कि जहां पानी निकल रहा है वहीं से ही पारदर्शी पाइप ऊपर गया है जिसके भरोसे हवा में लटकता दिखता नल है।

आज मैं अहमदाबाद में प्रांत टोली के साथ चर्चा कर रहा था। उसमें विषय आया कि रोजगार के विषय को ग्रामीण क्षेत्र में कैसे बढ़ाया जाए?
तब सहसंयोजक चैतन्य भट्ट जी ने बताया की जयपुर के स्वदेशी संगम में उनके हिम्मतनगर से उनके साथ रमेश कुमार जी भी गए थे।
वहां डॉ भगवती प्रकाश जी ने बोलते हुए कहा की टमाटर की चटनी बनाने में कौन सी बड़ी टेक्नोलॉजी चाहिए? पर पेप्सिको कंपनी चटनी बनाकर₹5 का टमाटर ₹50 की बोतल में बेचती है। हमें किसानों को प्रशिक्षित करना चाहिए कि ऐसे काम तो वे स्वयं करके कमाई कर सकते हैं।
यह विचार रमेश कुमार को दिल में उतर गया। वह स्वयं एक फैक्ट्री में काम करते थे। किंतु वापसी पर ट्रेन में ही उन्होंने निश्चय कर लिया कि मैं गांव जाकर टमाटर की चटनी बनाने का अपना ही काम शुरू करूंगा।
और आज 3 साल बाद उनके पास 35 लोग काम कर रहे हैं।बहुत अच्छी कमाई हो रही है।बैंक का थोड़ा लोन है,लेकिन चिंता वाली बात नहीं।
बल्कि काम बढ़ गया तो अब उन्होंने आलू चिप्स के लिए कड़ी में एक दूसरी फैक्ट्री लगाने की भी योजना बना ली है।
अगर हमारे युवा हिम्मत करें तो फूड प्रोसेसिंग यानी, खाद्य पदार्थों को बनाकर बिक्री करने की प्रक्रिया में ना तो ज्यादा पैसा चाहिए, ना ही बड़ी टेक्नोलॉजी। चंडीगढ़ से दिल्ली जाओ तो दोनों तरफ छोटे बड़े ढाबों की भरमार है।जिनसे हजारों लोग अच्छी कमाई और रोजगार प्राप्त कर ही रहे हैं।