2 दिन पूर्व मैं टाटा ग्रुप का इतिहास पढ़ रहा था। कैसे जमशेदजी टाटा ने इस औद्योगिक घराने की नींव रखी तो मेरे मन में आया कि रतन टाटा को एक पत्र लिखना चाहिए। आप भी पढ़िए।
आदरणीय रतन टाटा जी!
सादर प्रणाम!
मैं एक स्वदेशी कार्यकर्ता के नाते से आपको यह पत्र लिख रहा हूं।आप अपने जीवन के 78 बसंत पार कर चुके हैं।आपके पूर्वजों ने इस देश को सबसे बड़ा और गुणवत्ता वाला उद्योगिक घराना दिया है।इसके लिए हम सब लोग आपका आभार व्यक्त करते हैं।
सबको मालूम है कि आप के परदादा जमशेतजी टाटा ने ना केवल भारत में बड़ा स्टील प्लांट लगाने का विचार किया, बल्कि स्वामी विवेकानंद की प्रेरणा से भारत का सबसे बड़ा शोध संस्थान IISc. बेंगलुरु भी शुरू किया।
आपकी तीन पीढ़ी के पूर्वजों ने ना केवल सारे भारत वा दुनिया में टाटा के नाम से बड़ी मात्रा में उद्योग खड़े किए बल्कि उनमें नैतिकता का भी मापदंड रखा।
आपकी कंपनी टीसीएस भारत की 1लाख करोड रुपए पार करने वाली पहली भारतीय कंपनी बनी है। आपकी सब कंपनियों में मिलाकर इस समय पर 6,65,000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है।
और इनके कारण से जो अप्रत्यक्ष रोजगार पनपा है वह तो और भी कहीं अधिक है।
हमें याद है जब मुंबई में पाकिस्तानी आतंकियों ने हमला किया था तो आपने नैतिक मानदंड रखा। आपके होटल में मारे गए लोगों का तो आपने मुआवजा दिया ही जो बाहर भी मारे गए थे उन सबके परिवारों की पूरी देखभाल करने का जिम्मा आपने अपने ऊपर लिया।
फिर आप स्पष्ट निर्भीकता का परिचय देते हुए नागपुर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनजी भागवत के पास केवल एक बार नहीं बल्कि दो-तीन बार गए।आपने किसी प्रकार का संकोच संघ के कार्यक्रम में आने में नहीं किया।
हो सकता है कुछ लोग आपके उद्योग के बारे में अलग प्रकार का विचार भी देते हों, उसमें कुछ सत्यता भी हो सकती है किंतु इस देश के जनसामान्य में यह धारणा है कि आपने एक मूल्यवान उद्योगिक घराना भारत को दिया है।
हम जानते हैं आप अविवाहित हैं। किंतु हमें यह भी विश्वास है कि आप आगे भी टाटा कंपनीज अच्छे ढंग से चलें, व इस देश को रोजगार व आर्थिक समृद्धि की राह पर आगे ले जाने का मार्ग भी सदा बना रहे,
इस की पक्की व्यवस्था कर रहे हैं।
स्वदेशी कार्यकर्ता के नाते से इसे आप प्रशस्ति पत्र कहिए या फिर हमारा आभार।किंतु हां! भारतमाता को अपने पुत्र पर गर्व है,यह निश्चित है। धन्यवाद।