कश्मीरी लाल जी, शाखा वाले पार्क में पिल्ले को प्यार करते हुए
कल सवेरे कश्मीरी लाल जी और मैं संघ स्थान पर पहुंचे। वहां पार्क में एक माताजी अपने साथ डॉगी को लेकर आती हैं। कश्मीरी लाल जी कुछ दिन से उस पिल्ले को थोड़ी देर सहला देते थे। और कल मैंने देखा, यद्यपि हम दोनों ने ही एक साथ पार्क में प्रवेश किया पर वह पिल्ला दौड़ता हुआ कश्मीरी लाल जी पर ही चढ़ने लगा। खैर कश्मीरी लाल जी ने उसको पुचकारा। उसकी पूंछ लगातार हिल रही थी। वह कश्मीरी लाल जी का हाथ चाटने लगा था मैं सोच में था की वह मेरी तरफ क्यों नहीं आया? कारण स्पष्ट था कि तीन-चार दिन से वही उसको प्यार दुलार कर रहे थे।
यह यह बात मनुष्यों से लेकर पशु तक सब पर लागू होती है। यदि आप उसको प्रेम से (मन से) बात करते हैं तो न केवल वह भी आपको प्रेम करता है बल्कि आपकी बात मानने को तैयार भी रहता है।
यह संगठन शास्त्र का पहला नियम भी है। संगठन का प्रारंभ स्वस्थ संबंधों से होता है। विचार, उद्बोधन सब बाद में आते हैं।
परिवार में कई बार अपेक्षाएं और अपनी आवश्यकताएं, इतनी अधिक हम दूसरे पर थोपते हैं, जिसमें प्रेम की कोमल भावनाएं पीछे छूट जाती हैं। परिणाम: अच्छा परिवार भी उत्साह व प्रेम का केंद्र नहीं रहता। इसलिए सब कार्यों से अधिक प्राथमिकता दूसरे को प्रेम देना उसकी सुनना, समझना, सहयोग करना रहे। तो फिर परिवार हो या ऑफिस आनंद और सफलता से भर जाता है।~सतीश कुमार