गत स्वदेशी कार्यसमिति का फोटो व अपने प्रेमजी
हमारे प्रेमजी…संघ के पूर्व उतर क्षेत्रप्रचारक व अ:भा:सेवाप्रमुख प्रेम जी गोयल से परसों चंडीगढ़ कार्यालय पर भेंट हुई। मैंने पूछा “कितनी आयु हो गई प्रेमजी?” बोले “1937 का जन्म है, लगा लो हिसाब!”और गत 57-58वर्षो से प्रचारक!सदा मुस्कुराते,सबको शाबासी देते स्नेही मार्गदर्शन भी! ग़ुस्से में तो शायद ही किसी ने कभी प्रेम जी को देखा हो! कितनों के परिवार बसाए,कितनों को काम में लगाया और कितनों को प्रचारक निकाला,कोई हिसाब नहीं ! उनकी हिसाब रखने की इच्छा भी नहीं…न नाम की इच्छा न किसी ओहदे आदि की…साधना नित्य साधना, साधना अखण्ड साधना…प्रेम जी तो प्रतिनिधि हैं,उस असाध्य परंपरा के, बाकि साधक तो हज़ारों हैं ही…
इस राष्ट्र साधना के परिणाम? इसे राजनीति नहीं,राष्ट्रीय उपलब्धि समझना…आज सवेरे ही अख़बार उठाया तो पड़ा कि त्रिपुरा, नागालैंड व मिज़ोरम के चुनावों में भाजपा तगड़ी टक्कर में! आपको याद हो 22-23वर्ष पूर्व त्रिपुरा से अपने चार प्रचारक अगुआ कर मार दिए गए थे!उधर मिज़ोरम 75%.तो नागालैंड 85%ईसाई बहुल है!और आज वहाँ भगवा सरकारों की तैयारी हो रही है! असम अरुणाचल व मणिपुर में तो पहले ही भाजपा सरकारें बन चुकी हैं!अपने प्रचारक राममाधव जी पूरा मोर्चा संभाले हुए हैं!आज पूर्वाचंल के भगवामय होने का कारण- वनवासी कल्याण आश्रम से लेकर विद्याभारती के विद्यालय तक खड़े करने मे न जाने कितने कार्यकर्ता और प्रचारक खप गए…शाखा में गीत गाया करते थे..”हिन्दुभूमि की हम संतान,नित्य करेंगे इसका गान…नीलगगन पर फैहरायेगें,भगवा अमर निशान..3”..जय हो…