Image may contain: 5 people, people smiling

सुकुमार जी (मेरे दायीं और) व उनसे मिलने के लिए आए आंध्रप्रदेश ‘सक्षम’ दो कार्यकर्ताओं के साथ

परसों रामलाल जी के राजनीति से मुक्त होकर संगठन का काम करने की बात लिखी तो आज एक दूसरे प्रचारक जो संगठन से अब दिव्यांगों की सेवा में लगे हैं उनके बारे में भी सुनो।
उसी विजयवाड़ा की बैठक में मेरे साथ वाले बिस्तर पर सुकुमार जी थे। वे अपने संगठन ‘सक्षम’ के अखिल भारतीय संगठन मंत्री हैं।
मैंने उनसे पूछा “इसमें किस प्रकार की सेवा के काम होते हैं?”
तो सुकुमार जी ने बताया “दृष्टिबाधितों के लिए प्रमुख रूप से यह काम शुरू हुआ था। लेकिन अब तो जो भी दिव्यांग हैं, उन सब के लिए यह संगठन काम कर रहा है। फिर चाहे वह मूक हों, बधिर हों, मानसिक रूप से कमजोर – विक्षिप्त हों!”
“उनकी सामान्य सेवा व व्यवस्था करवाने से लेकर प्रदेश व केंद्र सरकारों में उनके लिए प्रदत्त सुविधाओं का पूरा उपयोग करवाने में यह अपना संगठन सक्रिय रहता है। देशभर में 60 केंद्रों से यह काम चल रहा है।”

कुल 8 प्रचारक व सैकड़ों कार्यकर्ता,इस कार्य के लिए दिन रात लगे रहते हैं। और सुकुमार जी जो स्वयं एमबीबीएस कर प्रचारक बने,आंध्रप्रदेश के लंबा समय प्रांत प्रचारक रह चुके हैं।और इस सारे को वे कोई बड़ा परोपकार का काम नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य मानकर दिन रात लगे रहते हैं।न कोई नाम की ईच्छा है,पद का कोई सवाल ही नहीं…अर्हनिशं,सेवामहे!
मैं आश्चर्य में था कि जिसने जिंदगी भर शाखा की ट्रेनिंग ली हो, कैसे वह दिव्यांगों की सेवा और उनके अधिकारों के लिए लड़ने की प्रक्रियारत है, उनके लिए एक देवता के रूप में सफलतापूर्वक देश भर में कार्य खड़ा कर रहा है।
मैंने सुकुमार जी को प्रणाम किया और तभी सोचा कि चिट्ठी के माध्यम से अपने सब स्वदेशी प्रेमी बंधुओं को बताऊं, कि कैसे-कैसे काम अपने प्रचारक व कार्यकर्ता कर रहे हैं।