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उक्त गांव के फसल काटते लोग तथा गत शिमला प्रवास में कार्यकर्ताओं संग सेल्फी

मैं पिछले सप्ताह राजस्थान के प्रवास पर था। एक बात मेरे ध्यान में आई कि जब से (4 महीने पहले)वहां पर कांग्रेस की सरकार आई है और जैसा कि आमतौर पर कांग्रेसी सरकारें, प्रतिशोध लेते हुए करती हैं, राजस्थान के 200 से ऊपर अपने कार्यकर्ताओं का स्थानांतरण दूरदराज कर दिया गया है।
अपने एक प्रांत स्तरीय कार्यकर्ता का स्थानांतरण कोई 225 किलोमीटर दूर कर दिया गया। जहां पर पहले ट्रेन,फिर बस, फिर तांगा पकड़ कर जाना पड़ता है। मुझे लगा कि वह कार्यकर्ता परेशान होगा।
मैंने पूछा “कैसे चलेगा काम,घर भी देखना होगा?”
तो वह बोले “सतीश जी!चिंता ना करें! वहां पर स्वदेशी की इकाई पहले नहीं थी,अब हो जाएगी। मैंने वहां पर भी कार्यकर्ता ढूंढ लिए हैं।”
यही बात एक दूसरे कार्यकर्ता ने जिसका 125 किलोमीटर दूर स्थानांतरण हुआ है उसने भी कही। उनकी बातें सुनकर मेरा सीना गर्व से चौड़ा हो गया। और मैं सोचने लगा “ऐसे निस्वार्थी और साहसी कार्यकर्ताओं के कारण से ही स्वदेशी का कार्य सारे राजस्थान और सारे देश में फैल रहा है।”
वहीं दूसरी एक घटना की जानकारी, मुझे फेसबुक पोस्ट से मिली।
जहां पर एक गांव में एक व्यक्ति की मृत्यु हो गई तो उसकी शोकसभा में पहुंचे लोगों ने सोचा कि उसकी फसल खड़ी है और घर में काटने वाला कोई नहीं है।
शोक सभा क्या करना? उसकी फसल अगर कट जाए तो वास्तव में उपयुक्त होगा।
और सारे आए हुए व्यक्ति लग गए और उन्होंने तुरत फुरत में ही सारा खेत काट डाला।
यह है हमारे गांव,हमारे परिवारों की सोच।
दुनिया में सबसे अलग।