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विश्वविद्यालय में ठेंगड़ी जन्म शताब्दी का कार्यक्रम व कारसेवक पुरम मे रामशिलाओं के साथ

आज प्रवास में अयोध्या जाना हुआ। सवेरे सवेरे रामलला के दर्शन किए।
वहां राजीव जी के साथ चर्चा निकली “मंदिर निर्माण की प्रक्रिया तो शुरू हो गई है, पर केवल मंदिर बनने से क्या होगा?”
राजीव जी बोले “और क्या करना है?”

मैंने कहा की “राम जी को अपनी प्रजा की चिंता है कि नहीं? प्रजा अगर भूखी हो, बेरोजगार हो, तो राम जी केवल मंदिर में विराजें, यह कैसे होगा?”
बाद में जब विश्वविद्यालय में कार्यक्रम शुरू होना था तब मैंने स्वदेशी में प्रचारक अजय उपाध्याय जी से कहा की अयोध्या विजन-2020 पर काम हो सकता है क्या?”

अजय जी बोले “वह कैसे?” मैंने कहा की वैष्णो देवी के कारण से जम्मू की इकॉनमी और रोजगार में बड़ा फर्क पड़ा, तिरुपति बालाजी से आंध्र प्रदेश में।
तो अगर योजनाएं ठीक-ठाक ढंग से की जाए तो राम मंदिर और अयोध्या निर्माण से उत्तर प्रदेश की इकानमी और रोजगार की समस्या तो हल हो ही सकती है।”
अजय जी मुस्कुराए और बोले “ऐसा संभव है क्या?”

मैंने कहा “गत वर्ष जब कुंभ मेला लगा था तो सरकार ने तो 5000 करोड़ रुपए ही दिए थे पर उससे 1.19 लाख करोड़ रुपए की इकॉनमी जनरेट हुई थी और 50000 से अधिक लोगों को 6 महीने के लिए अधिक रोजगार मिल गया था।”

सारी टोली ने हामी भरी और संकल्प किया कि इस विषय में कुछ बड़ा करने की सोचेंगे।
आपको भी कोई विचार सूझे,तो नीचे लिख भेजें।

सतीश कुमार