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तिरूपति में सतत विकास पर संगोष्ठी का उदघाटन करते कश्मीरी लाल जी,संस्कृत विश्विद्यालय के उपकुलपति(VC) व अन्य।नागपूर में ठेंगड़ी जी के साथ कार्य करने वाले राजाभाऊ पोफली

कल मैं नागपुर में था।वहां पर 84 साल के अपने पुराने कार्यकर्ता राजाभाऊ पोफली, उनसे मेरी बातचीत हुई।स्वदेशी जागरण मंच के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगड़ी जी के बारे में कोई पुरानी घटना अथवा उनके प्रसंग सुनने की मन में इच्छा थी।
मैंने पूछा “ठेंगड़ी जी, विरोधी लोगों को भी जोड़ कैसे लेते थे?” तो उन्होंने उत्तर दिया “उनकी विशेषता थी प्रेम पूर्वक संपर्क! वह संपर्क बहुत करते थे। और जिस से संपर्क करते थे उसको बहुत प्रेमपूर्वक बात करते थे।
उसको एहसास दिलाने के लिए, कई बार तो वे उसकी तरफ ऐसे देखते व हां हां भरते थे, जैसे वह पहली बार ही उसकी बात सुन रहे हैं। इससे सामने वाले का सीना गर्व से फूल उठता था।”
“इसी पद्धति से ही उन्होंने नागपुर विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर प्रोफेसर बोकरे जी को,जो कि वामपंथी विचारधारा के थे,अपने साथ जोड़ लिया और अंततः स्वदेशी जागरण मंच का पहला अखिल भारतीय संयोजक बना लिया।
वे बोले दत्तोपंत ठेंगड़ी तो एक महा प्रेम की चुंबक थे जिसको छू लेते थे वह उनसे चिपक जाता था।”
बाद में मैंने सोचा कि हम गीत गाते ही हैं
शुद्ध सात्विक प्रेम…अपने कार्य का आधार है।
दतोपंतजी उसका आदर्श उदाहरण थे।

*परसों कश्मीरी लाल जी का तिरुपति में भव्य कार्यक्रम हुआ। विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थी व अध्यापक उपस्थित हुए।शाम को महिलाओं का भी कार्यक्रम हुआ जिसमें 350 महिलाएं उपस्थित हुईं। और वे कल केरल के प्रवास पर निकल गए।
कश्मीर से केरल तक स्वदेशी ही स्वदेशी।