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फिरोजपुर में हुए कार्यक्रम के कुछ फोटो

कल सवेरे मैं पंजाब के फिरोजपुर से सवेरे जल्दी (5: बजे) नई दिल्ली स्टेशन पहुंचा। ऊपर प्लेटफॉर्म पर ही ऑटो वाले आ गए। एक नौजवान ने मेरे से पूछा “कहां चलना है?” मैंने बताया “आरके पुरम-8” उसने कहा “₹200 लगेंगे!” मैंने कहा “135-40 में तो सब जाते हैं। सवेरे का समय है। डेढ़ सौ ले लो!”
उसने कहा “बाबूजी! 180 दे देना!”
मैंने कहा “नहीं! 160 से ऊपर तो बिल्कुल नहीं दूंगा!” तभी उसने मेरा बैग पकड़ लिया और उठा कर आगे बढ़ने लगा। तो मैंने कहा “मेरी तेरे से बात पक्की तो हुई नहीं है…अगर मैं तेरे साथ ना गया तो?”

वह बोला “तो भी कोई बात नहीं, बाबू जी! आप बड़े आदमी हो (उम्र)। थोड़ी मेरी सेवा ही सही! वैसे उधर से वापसी सवारी नहीं मिलती, इसलिए मैंने आपसे ₹30 फालतू मांगे हैं, नहीं तो मुझे पता है की 150 का ही रेट है।”

खैर! मैंने उसको कहा “चलो ₹170 दे दूंगा!”
ऑटो में बैठते ही उसने साइड का पर्दा लगाया। मैंने कहा “यह क्या?” “बाबूजी! ठंड शुरू हो गई है,यह पर्दा लगाने से आपको ठंडा नहीं लगेगा।”

ऑटो चलने लगा मैंने बात जारी रखी।
उसने बताया “मेरी अभी शादी नहीं हुई,मेरे पिताजी भी ऑटो चलाते थे।उन्होंने कहा था “सवारी का ध्यान रखो,तो सवारी तुम्हारा ध्यान रखेगी।तब से मैं सवारी की सुविधा का भरपूर ध्यान रखता हूँ और अक्सर सवारी मेरा पूरा ध्यान रखती है(अछे पैसे देती है)। फिर मैंने उससे पूछा ‘कोई बीड़ी, सिगरेट, शराब तो नहीं पीते हो? तो उसने कहा “नहीं! बिल्कुल नहीं! तब मैंने उसको अच्छे और सच्चे जीवन की कुछ व्यवहारिक बातें बताईं। जो उसने बड़े ध्यान से सुनी।

इतने में ही कार्यालय आ गया। पहले तो मैंने उसको दिए ₹170…फिर मैंने 10 और देते हुए कहा “ये तेरी सीख के।” उसकी आंखों की चमक और मुस्कुराहट ने मेरे को उमंग से भर दिया। सामने शाखा का समय हो गया था पर मैंने सोचा मेरी तो शाखा का काम आज हो गया है।