पटना के एक पंडाल में कार्यकर्ता राज किशोर जी के साथ
मैं कल पटना में था! वहाँ पर सायंकाल में स्वदेशी टोली की बैठक करने के बाद वहाँ के कार्यकर्ता राज किशोर जी मुझे विभिन्न प्रकार के दुर्गा पंडाल दिखाने ले गए!
पटना में इस समय सैकड़ों ऐसे पंडाल लगे हैं!
उससे पहले वहाँ बिहार के क्षेत्र प्रचारक रामदत जी से जब चर्चा हो रही थी तो मैंने उन्हें बताया कि इस वर्ष रोज़गार पर्यावरण व परिवार पर हम कार्यक्रम ले रहे हैं ! तो उन्होंने मुझसे कहा “सतीश जी,क्या आपने कभी मंदिरों से,तीर्थ स्थानों पर जाने वाले यात्रियों से,होने वाली आय या रोज़गार का हिसाब भी लगाया है क्या?
उनके हिसाब से हज़ारों लोग तो इसी तीर्थ यात्रा, मंदिर- गुरूद्वारों से अपना रोज़गार भी कमाते हैं! और यह बात ठीक भी है!
अपने एक कार्यकर्ता प्रोफ़ेसर लिंगा मूर्ति जिन्होंने हैदराबाद के गणेशोत्सव के समय एक सर्वेक्षण करवाकर लंबा शोध पत्र तैयार किया है,उसके अनुसार केवल गणेश उत्सव के 10 दिनों में ही,अकेले हैदराबाद शहर से कोई 55, हज़ार लोगों को रोज़गार मिलता है! यानी यह मंदिर-गुरूद्वारे यह हमारे त्योहार,तीर्थस्थान,ये हैं भारत के अर्थशास्त्र को चलाने में,रोज़गार वृद्धि में अच्छे सहायक!
चाहे वैष्णो देवी हो,शबरी मलाई केरल हो,स्वर्ण मंदिर पंजाब हो अथवा तिरुपति बालाजी…इन सब स्थानों के कारण से लाखों लोगों का रोज़गार जुड़ा है!
ठेले वाले,होटल वाले,ऑटो वाले,टैक्सी वाले सब प्रकार के लोग उससे रोज़गार पाते हैं!
निश्चित रूप से इस देश की जनता का सामाजिक व्यवहार,व्यक्तिगत व्यवहार व धर्म का पालन कराने के साथ साथ ये तीर्थ उनकी अर्थव्यवस्था के भी आधार हैं!
विश्व में गूंजे हमारी भारती..
जन जन उतारे आरती
धन्य देश महान,धन्य हिन्दोस्तान!