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1984 की एक शाम,अंबाला का ऐस ऐ जैन हाई स्कूल का सभागार।उसमें उपस्थित लगभग 250 स्वयंसेवक। प्रमुख अधिकारी बारी बारी से खड़े होकर अपने नगर के कॉलेज में ही कुछ समय प्रध्यापक रहे और संघ के जिला कार्यवाह का दायित्व निभाते हुए अब प्रचारक जीवन में प्रवेश करने वाले युवक के बारे में कुछ ना कुछ प्रशंसा में बोल रहे थे।
संघ में इस प्रकार से प्रचारक निकलने वाले के लिए विदाई कार्यक्रम में एक असामान्य बात यह थी की निकलने वाले युवक के माता-पिता भी वहां उपस्थित थे।
वह बोले भी और उनका सम्मान भी किया गया। अपने सबसे बड़े और योग्यतम पुत्र को सहज रूप से प्रचारक जाने के लिए आशीर्वाद देना और यह पता होते हुए भी कि वह अब संभवत जिंदगी भर लौटेगा नहीं, उनकी उपस्थिति उनकी सहमति-अनुमति का प्रतीक भी थी। धन्य हैं ऐसे माता पिता! उनको शत-शत प्रणाम!
यह प्रचारक कोई और नहीं आज स्वदेशी जागरण मंच के अखिल भारतीय संगठक कश्मीरी लाल जी ही थे। जो गत 35 वर्षों से देशभर में लगातार भ्रमण करके स्वदेशी की अलख जगा रहे हैं। उनका आज जन्मदिन है।

डॉ हेडगेवार, गुरुजी और स्वामी विवेकानंद जिनके आदर्श हैं वह कुछ ऐसे गुणों के भी धनी हैं जिनको सामान्य कार्यकर्ता नहीं जानते। जैसे तबला वादन गायन,कथा वाचन आदि। जो गुण उनके सब जानते हैं वह हैं मृदुभाषी,हंसमुख,अध्ययनशील अच्छे वक्ता व कठिन परिस्थिति में से भी सहज सरलता से रास्ता निकालने की उनकी क्षमता। सतत प्रवासी का प्रचारक गुण तो है ही।
अन्य बहुत से अन्य बहुत से कार्यकर्ताओं की तरह मुझे भी गत 35 वर्षों से उनका स्नेह व मार्गदर्शन मिलता रहा है।मेरे विकास में उनकी बड़ी भूमिका है।

आज उनके जीवन के 68 वर्ष पूरे हो गए। ईश्वर उन्हें अच्छा स्वास्थ्य व लंबी आयु प्रदान करें। ताकि वे देशभर के कार्यकर्ताओं का सतत मार्गदर्शन करते रहें बहुत-बहुत शुभकामनाएं!!