गत दिनों त्रिपुरा के विधानसभा चुनाव में कम्युनिस्ट पार्टी की हार के बाद वहां पर एक चौराहे पर स्थापित लेनिन की मूर्ति को वहीं के लोगों ने गिरा दिया!उसकी फोटो सारेदेश ही नहीं दुनिया में वायरल हो गए! भारत के मीडिया के एक वर्ग ने बहुत शोर मचाया! यह तकनीकी मामला है एक मूर्ति का गिरना!वास्तव में यह उद्घोषणा थी भारत से वामपंथ के समाप्ति की!यह लेनिन कभी भारत आए नही,भारत के बारे में कोई उनके विचार नहीं!और दूसरी तरफ स्वयं उनके देश जो अब रूस से अलग हो गया है यूक्रेन! उसमें छोटी-बड़ी लगी कुल 1368 मूर्तियां वहां के लोगों ने निकाल बाहर फेंकी!जिस रूस में बोल्शेविक क्रांति लाए लेनिन,उसको वहां के लोगों ने उखाड़कर एक तरफ फेंक दिया और यहां देखिए एक विदेशी व्यक्ति जिसका उसके ही देश में इतना विरोध हुआ हो उस की यहां पर मूर्तियां लगाना और फिर उनके मूर्तियों के स्थानीय लोगों द्वारा उखाड़ फेंकने पर शोर मचाना यह विचित्र बात है!जो भी हो यह विचार असत्य पर आधारित होने के कारण से देश और दुनिया से समाप्त हो गया है!
इन विदेशियों को चाहे बाबर हो लेनिन हो अथवा मैकाले हो इस देश से सदा के लिए विदा होने का समय आया है!भारत अब और विदेशी प्रतीकों को ढोने के लिए तैयार नहीं है!Decolonization of Bhart is complete now!
परसों मै जब वाराणसी पहुंचा तो वहां के सह संयोजक आनंद श्रीवास्तव मुझे मुगलसराय स्टेशन पर लेने आए! उन्होंने वहां पर स्थित 1276 नंबर खंबा जहां पर पंडित दीनदयाल जी का 1967 में शव मिला था,मुझे ले गए!स्वदेशी के कार्यकर्ताओं ने उस स्थान को फिर चिन्हित कर वहां पर एक प्रतीक बनाने का निर्णय किया है!मुगलसराय स्टेशन का भी नाम पंडित दीनदयाल उपाध्याय पर रखने का विषय है!मैंने उस स्थान पर जाकर माल्यार्पण किया….जय स्वदेशी जय भारत