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आज हुई रोजगार पर चर्चा के कुछ दृश्य!

आज मेरा दिल्ली के JNU कैंपस में जाना हुआ! वहां पर संस्कृत विभाग में रोजगार पर एक चर्चा आयोजित थी।रोजगार का विषय तो होना ही था…किंतु इन दिनों चल रहा जेएनयू में छात्रों की फीस को लेकर विवाद व उनके प्रदर्शन का मामला निकला।

वहां के कुछ लोगों ने पूछा “कल रात जो विद्यार्थियों की पिटाई हुई है वह कितनी उचित है?”
मैंने कहा “मुझे ऐसी कोई जानकारी नहीं है कि कल रात पुलिस ने धरने पर बैठे जेएनयू के वामपंथी छात्रों पर बिजली स्विच ऑफ करके अच्छी खासी डंडा पिलाई की है। किंतु यह सच हुआ तो सारा देश बहुत खुश होगा। सारे देश में जेएनयू के इन वामपंथी उद्दंड, छात्रों के साथ किसी को भी कोई सहानुभूति नहीं है”।

कुल मिलाकर चर्चा में से उभरा की वामपंथियों व देश विरोधियों के गढ़ जेएनयू में अब लगभग काफी चीजें काबू आ गई हैं। स्वामी विवेकानंद की मूर्ति वहां लग गई है। ऊंचा तिरंगा लग गया है। पुराना टैंक वहां रख दिया गया है। वहां की सुरक्षा व्यवस्था पूर्व सैनिकों को दी जा रही है।

वामपंथ के इस अंतिम गढ़ के गिरने का समय है। देशवासी थोड़ा धैर्य रखें। सभी चीजें योजना अनुसार जा रही हैं। सूर्योदय का समय है…भगवा संपूर्ण देश की तरह जेएनयू पर भी छाएगा ही।
वहां संघ की शाखाएं अंदर लगती हैं, विद्यार्थी परिषद की बहुत सक्रिय इकाई है। स्वदेशी सहित परिवार संगठनों के कार्यक्रम वहां होते रहते हैं।