गली में रावण बनाने वाले बच्चों के साथ बात करते हुए जयपुर में! नागपूर रेशमबाग में विजयदशमी कार्यक्रम में स्वयंसेवक!
मैं आज सवेरे जयपुर के विजयदशमी उत्सव में था। अभी सायंकाल में मैं कार्यालय के साथ वाली गली में सैर कर रहा था।अचानक मैंने देखा कि गली के कोने पर दशहरे की तैयारी हो रही है।
उत्सुकतावश मै वही पर चला गया।वहां देखा तो छोटे और बड़े बच्चे ही थे।मैंने उनसे बात की “क्या नाम है तुम्हारा?”
तो दोनों युवक बोले “सुमित और भरत वाल्मीकि!”
मैंने कहा कि दशहरा किस का मना रहे हैं?”
तो कहने लगे यह हमारी बस्ती के लड़के मिलकर हर साल मनाते हैं!”
मैंने पूछा “इस पर कितना खर्च आया है? और कहां से इकट्ठा किया है?”
तो उन्होंने कहा “साथ वाले बाजार से कुल मिलाकर ₹4000 इकट्ठा किया है!” मैंने पूछा “और भी कहीं से लिया है?”
कहने लगे “नहीं!किंतु बम लगाने में अधिक पैसे लग गए!इसलिए हमने अपनी जेब से ही पैसे डाले हैं!”
मैं सोच में था कि जब बच्चे अपनी जेब से पैसे डालकर और दशहरा मना रहे हैं तो इस देश के जन-मन में राम के प्रति जब इतना सम्मान है तो इस देश में राम के मंदिर को रोकना कितनी देर तक संभव है?
कल विजयदशमी नागपुर के अवसर पर बोलते हुए सरसंघचालक जी ने संसद में कानून बनाने की बात कही ही है!ऐसा लगता है कि अब राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू होने में अधिक देर नहीं लगेगी! इसलिए इस देश का एक बड़ा इतिहास का पन्ना यह रचने की तैयारी हो रही है,कि अयोध्या में राम जन्मभूमि मंदिर बनने की प्रक्रिया यह आगे बढ़ रही है!
जय श्री राम!