एक सहयात्री के साथ
मैं आज सवेरे दिल्ली से कुरुक्षेत्र जा रहा था। जब पानीपत स्टेशन आया तो वहां पर ब्रेड पकोड़े बेचने वाला डिब्बे में चढ़ा आया।मेरी इच्छा हुई तो मैंने उसे कहा “एक ब्रेड पकोड़ा देना भाई”और मैं जेब से पैसे निकालने लगा!
इतने में ही साथ ही दूसरा ब्रेड पकोड़े वाला भी आ गया! मैंने ध्यान ना करते हुए दूसरे वाले को ₹10 देने चाहे कि ब्रेड पकोड़ा दे दे। किंतु उसने कहा “साहब आप उसके कस्टमर हैं!”जो उससे एक कदम आगे खड़ा था!
मैं यह देखकर हैरान था कि उसने अपना कस्टमर उसको दे दिया!यह बात छोटी है,किंतु बड़ी महत्व की है!
साथ बैठी सवारी इसी बात की मेरे से चर्चा करने लगी।
ऐसे ही कुछ दिन पूर्व जब में जोधपुर से दिल्ली कैंट आया। तो स्टेशन से मैंने ऑटो लिया क्योंकि उन दिनों में ड्राइवर अपने घर गया हुआ था।
जब कार्यालय पहुंचा तो मैंने मीटर देखा उसमें 74 रुपए थे। मैंने उसको 20-20 के 4 नोट याने ₹80 दिए और उसकी तरफ इस भाव से देखा कि वह वापस मेरे ₹6 दे। उसने ₹5 लौटाए तो सही,किंतु मुझे लगा कि वह यह देख रहा था कि मैं छोड़ दूं तो अच्छा।
तो तुरंत मैंने सोचा और उसको ₹5 वापस कर दिए किंतु वह इंकार करने लगा(शायद रोष में)!
मैंने कहा “अरे कोई नहीं भाई!ले लो, मैंने ध्यान नहीं किया था।” तो उसने रख तो लिये, पर साथ ही बोला की साहब ₹5 से क्या फर्क पड़ता है? असली कमाई(अमीर) तो, आदमी अपनी ही मेहनत से होता है!
तो मैंने उसको थोड़ा टोकते हुए कहा “कि नहीं भाई अमीर या बड़ा आदमी तो बड़ी सोच से बनता है।हां तुम्हारे पास भी बड़ी सोच है, इसलिए मुझे लगता है तुम आगे चलकर बड़े आदमी जरूर बनोगे।”
वह मुस्कुराया और उसने अपना ऑटो आगे बढ़ा दिया।
मुझे लगा कि ड्राइवर या खोमचे वालों में भी उच्च जीवन मूल्य तो बहुत अच्छे स्तर के होते हैं।और कई बार बहुत उच्च स्तर के दिखते लोग भी हल्की और मूल्य विहीन बातें करते हैं।जीवन में बड़ा होना है तो कुछ जीवनमूल्य होना यह अत्यंत आवश्यक है।