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[RCEP के बारे में कुछ प्रश्न और उनके उत्तर!]

प्रश्न: क्या है यह RCEP(Rigional comprehensive economic partnership) समझौता? कब से यह होने वाला है?
उत्तर: यह 16 देशों का मुक्त व्यापार समझौता है इसकी प्रक्रिया 2012 (कांग्रेस समय) में शुरू हुई। इसमें10 आसियान देशों के अलावा ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड,कोरिया,जापान चीन व भारत है।
यह कुल दुनिया की 50% आबादी के देश हैं व कुल दुनिया की 30% जीडीपी इस क्षेत्र से निकलती है। यदि यह मुक्त व्यापार समझौता होता है तो इन सभी देशों को अपने सीमा शुल्क(टैरिफ) जीरो से लेकर 20% तक ही रखने होंगे। जो अभी तक कई कई चीजों में 70,80 या 100% भी हैं।

प्रश्न: भारत को इससे क्या नुकसान हो सकते हैं?
उत्तर: सबसे पहली बात है कि इसमें चीन है। जिसके माल सीमा शुल्क कम होने पर और तेजी से भारत में आएंगे, व्यापार घाटा और बढ़ेगा और यहां के उद्योग भी बंद होंगे रोजगार भी खत्म होगा। फिर न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया से डेयरी व कृषि जैसे दूध, दूध पाउडर,मक्खन चीनी आदि इन सबके आयात भारत में बढ़ जाएंगे। क्योंकि वहां पर ये सब्सिडी मिलने से बहुत सस्ते हैं।इससे हमारे किसानों को बहुत कठिनाई होगी।

प्रश्न:तो भारत यह समझौता क्यों करना चाहता है? कोई फायदा भी है क्या?
उत्तर: सर्विस सेक्टर में भारत के लोग इन 15 देशों में जा सकेंगे। क्योंकि इन सभी 16 देशों के मुकाबले में भारत का बैंकिंग,आई टी व अन्य सर्विस सेक्टर थोड़ा मजबूत है।पर भारत की असली ताकत हमारी कृषि, हमारे उद्योग हैं।इसलिए इस थोड़े से लाभ के चक्कर में हमें अधिक गंवाने का नहीं सोचना चाहिए।

प्रश्न:तो क्यों सरकार समझौता करने को बढ़ रही है? उत्तर:2012 से ही ब्यूरोक्रेसी और ऊपर के लोगों ने मन बनाया हुआ है।अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी है। किंतु उद्योग जगत, डेयरी व कृषि इनके लगातार विरोध के कारण से काफी संभव है यह समझौता ना हो।
यद्यपि आस्ट्रेलिया व आसियान देश यह आग्रह कर रहे हैं कि यह नवंबर तक इस पर हस्ताक्षर हो जाएं।
परंतु हम सब को विश्वास है कि जनता की आवाज सुनी जाएगी और यह समझौता नहीं होगा।