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सुंदरम जी, प्रोफेसर वैद्यनाथन जी, कश्मीरी लाल जी, मुंबई के शेखर स्वामी जी 

आज अभी मैं जब सवेरे की सैर व शाखा से लौट कर आया तो मैंने फोन उठाया। देखा मेल आई हुई थी। अपने अखिल भारतीय संयोजक सुंदरम जी की। किंतु अचानक मेरी निगाह उसके टाइम पर पड़ी सवेरे 3:25 a.m. मैं चौंका! तुरंत मैंने व्हाट्सएप देखा तो 4:30 पर भी उनका संदेश आया हुआ था। अर्थ एवं रोजगार सृजक सम्मान के 25 सितंबर को होने वाले बड़े कार्यक्रम के बारे में मैंने उनसे कुछ लोगों से बात करने का कहा था,उसी का उत्तर था।

फिर मैंने उनसे बातचीत की, तो पता चला कि IIM बैंगलोर के अपने प्रोफेसर वैद्यनाथन जी का प्रातः काल 5:00 बजे लंबा फोन उन्हें आया, की रिटेल सेक्टर को विदेशी कंपनियों से बचाने के लिए क्या-क्या किया जा सकता है। कल ही रिटेल के बारे में 20 अर्थशास्त्रियों की गहन वीडियो चर्चा हुई थी।

मैंने जब सुंदरम जी से पूछा कि “आप इतनी सवेरे कैसे उठकर काम करते हैं?” तो सहज रूप से ही अंग्रेजी में बोलते हुए उन्होंने कहा “कुछ लोग रात को बात करना पसंद करते हैं,कुछ सवेरे!” मैंने कहा “मतलब,आप देर रात को भी बात करते हैं क्या?”
उन्होंने कहा कुछ दिन पूर्व मुंबई के “शेखर स्वामी का फोन मुझे रात 10:30 बजे आया और वह मुद्रा लोन में हो रही गड़बड़ी के बारे में,और उसे कैसे ठीक कर सकते हैं,देर रात तक बात करते रहे।”

इधर कुछ दिन पूर्व सवेरे जब मेरी नींद खुली तो देखा सामने कश्मीरी लाल जी वाले कमरे में बत्ती जग रही थी। समय देखा 4:45! मैं थोड़ा घबराया। मैंने सोचा कुछ तबीयत ठीक तो हो? पर मैंने दरवाजा खोलते ही देखा! वह कुछ विषय अपनी डायरी में लिख रहे थे।
मैं सोच में पड़ गया की सवेरे 3:15 बजे से लेकर रात 12:00 बजे तक हमारे यह वरिष्ठ अधिकारी स्वदेशी की चिंतन,चर्चा, साधना कर रहे हैं…और ऋषि कौन से होते हैं?

जो भी हो, मेरी आस्था और विश्वास गहरा गया कि जिस स्वदेशी के पास ऐसे दिनरात चिंतन करने वाले साधकों की बड़ी संख्या हो,उस स्वदेशी विचार को सारे देश व दुनिया में प्रभावी होने में कोई नहीं रोक सकता…जय स्वदेशी जय भारत

~सतीश कुमार