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आज नागपुर के महिला उद्यमी सम्मान कार्यक्रम में बोलते हुए सरकार्यवाह माननीय भैया जी जोशी व स्वदेशी जा: मंच की महिला कार्य प्रमुख अमिता पतकी जी

आज नागपुर में स्वदेशी जागरण मंच की महिला विभाग द्वारा अर्थ एवं रोजगार सृजक सम्मान कार्यक्रम में बोलते हुए संघ के सरकार्यवाह भैया जी ने एक किस्सा सुनाया। वे विदर्भ में किसी एक गांव में गए थे। वहां जब 25- 30 नव युवकों से बातचीत की। पूछने पर उनमें से 20 युवक कहने लगे “हम बेरोजगार हैं कोई काम धंधा नहीं है।”

तो भैयाजी ने पूछा “तो आप सारा दिन करते क्या हैं?”
इस पर वे बोले “दिन में 8 से 10 घंटे तो खेत में लग जाते हैं।”

तब भैयाजी ने आश्चर्य से पूछा “क्या यह खेती काम नहीं है?” तो वह बोले “यह तो फालतू का काम है, कमाएं कहां से?” तो भैया जी ने कार्यक्रम में बोलते हुए कहा ” पहले हम कृषि से ही सर्वाधिक कमाते थे या कृषि आधारित उद्योगों से। बाद में यह संरचना टूट गई तो इसके कारण से कठिनाई हो गई।”

बात भी ठीक है। लेकिन अब फिर से जमाना बदल रहा है। पिछले दिनों मैंने पढ़ा की अलीगढ़ में एक जैन परिवार की लड़की 5 एकड़ खेत किराए पर लेकर वहां केंचुआ खाद बना रही है। और प्रतिमाह ₹2लाख तक की कमाई कर रही है। और उसने 10 लोगों को रोजगार भी दे रखा है।

सारे देश में अब कृषि से कमाने की प्रक्रिया चल पड़ी है। वास्तव में जब हम अपने पुराने विचार “उत्तम खेती मध्यम व्यापार…पर आएंगे तो यह दुनिया में सर्वाधिक कृषि योग्य भूमि (16 करोड़ हेक्टेयर) वाला देश दुनिया में आर्थिक रूप से समृद्ध बनने में देर नहीं लगाएगा।